नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में काम करने वाली अमेरिकी कंपनी एंथ्रोपिक ने अपने AI मॉडल क्लॉड को नैतिकता और मानवीय मूल्यों की समझ देने के लिए एक अनूठा कदम उठाया है। कंपनी ने वेदांत परंपरा के हिंदू संन्यासी स्वामी सर्वप्रियानंद को अपने सैन फ्रांसिस्को स्थित मुख्यालय में आमंत्रित किया था। यहां AI की नैतिकता, सही-गलत के अंतर और उन्नत AI की संभावित चेतना जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
धार्मिक विद्वानों और विशेषज्ञों से चर्चा
स्वामी सर्वप्रियानंद न्यूयॉर्क की वेदांत सोसाइटी के प्रमुख और रामकृष्ण संप्रदाय के संन्यासी हैं। उनके अनुसार, कंपनी ने शुरुआत में उनसे ऑनलाइन बातचीत की थी। इसके बाद उन्हें सैन फ्रांसिस्को बुलाया गया, जहां यात्रा और ठहरने की व्यवस्था कंपनी ने की।
स्वामी ने बताया कि बैठक में अलग-अलग धार्मिक परंपराओं से जुड़े विद्वान, काउंसलर और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी शामिल हुए। चर्चा का उद्देश्य यह समझना था कि AI को मानवीय परिस्थितियों में किस तरह जिम्मेदार और नैतिक व्यवहार करने के लिए प्रशिक्षित किया जा सकता है।
AI के फैसलों में नैतिक मूल्यों की भूमिका
एंथ्रोपिक का AI मॉडल क्लॉड सवालों के जवाब देने, लेखन और विभिन्न कार्यों में सहायता करने के लिए जाना जाता है। AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि ऐसे सिस्टम संवेदनशील परिस्थितियों में किस तरह प्रतिक्रिया दें और मानवीय मूल्यों का ध्यान कैसे रखें।
धार्मिक और दार्शनिक विचारकों से बातचीत इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है। भारतीय वेदांत दर्शन में आत्मचिंतन, नैतिक आचरण और चेतना जैसे विषयों पर विचार किया जाता रहा है। इन विचारों से AI के व्यवहार और नैतिक दिशा-निर्देशों पर चर्चा को नया दृष्टिकोण मिल सकता है।
हालांकि, किसी दार्शनिक परंपरा से चर्चा करने का अर्थ यह नहीं है कि AI में मानवीय चेतना विकसित हो गई है। AI की चेतना और नैतिक निर्णय क्षमता को लेकर वैज्ञानिक तथा दार्शनिक स्तर पर बहस जारी है।
तकनीक और दर्शन का संगम
इस पहल से संकेत मिलता है कि AI कंपनियां अब तकनीकी विशेषज्ञों के साथ-साथ धार्मिक विद्वानों और दार्शनिकों के विचारों को भी समझने में रुचि ले रही हैं। इसका उद्देश्य AI को अधिक जिम्मेदार बनाने के लिए नैतिक सवालों पर व्यापक दृष्टिकोण हासिल करना है।





