नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से अंतिम फैसला लेने की समय-सीमा बताने को कहा है। ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने आयोग से पूछा कि वह इस विवाद का निपटारा कितने समय में कर सकता है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।
दोनों गुटों के दावे से विवाद
ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके पारंपरिक ‘दो फूल और घास’ चुनाव चिह्न पर दो गुटों की ओर से दावा किया जा रहा है। चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी करते हुए दोनों गुटों के लिए मूल पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। आयोग के समक्ष दोनों पक्षों की ओर से पार्टी पर अधिकार को लेकर दस्तावेज और दावे पेश किए गए हैं।
आगामी पश्चिम बंगाल उपचुनाव को देखते हुए आयोग ने दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है। वहीं दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। यह व्यवस्था फिलहाल उपचुनाव के लिए अंतरिम तौर पर लागू है।
शिवसेना विवाद का भी दिया संदर्भ
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान शिवसेना के पुराने गुटीय विवाद का भी उल्लेख किया और कहा कि ऐसे मामलों में लंबे समय तक निर्णय लंबित रहने से स्थिति जटिल हो सकती है। अदालत ने चुनाव आयोग से विवाद के अंतिम निपटारे के लिए आवश्यक समय बताने को कहा है, जबकि दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का उचित अवसर देने पर भी जोर दिया।
पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। इसी चुनाव से पहले पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट अब 28 सितंबर को मामले की अगली सुनवाई करेगा।





