इंफाल। मणिपुर में अवैध प्रवासियों की पहचान को लेकर राज्य सरकार ने विधानसभा में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। सरकार के अनुसार राज्य में अब तक करीब 24 हजार अवैध प्रवासियों की पहचान की गई है। इनमें से 14 हजार से अधिक लोग म्यांमार वापस लौट चुके हैं।
सरकार की ओर से बताया गया कि अवैध प्रवासियों की पहचान और उनके संबंध में कार्रवाई की प्रक्रिया लगातार जारी है। यह मुद्दा मणिपुर में लंबे समय से संवेदनशील बना हुआ है और राज्य में जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर भी चिंता जताई जाती रही है।
मणिपुर में अवैध प्रवासियों का मुद्दा विशेष रूप से म्यांमार में 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद चर्चा में आया। इसके बाद म्यांमार से बड़ी संख्या में लोग भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में पहुंचे। राज्य सरकार और विभिन्न संगठनों की ओर से ऐसे लोगों की पहचान करने की मांग लगातार उठती रही है।
इसी बीच मणिपुर में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को अपडेट करने की मांग भी जोर पकड़ रही है। कई संगठनों का कहना है कि जनगणना से पहले नागरिकों और गैर-नागरिकों की पहचान स्पष्ट होना जरूरी है। इसी मांग के चलते राज्य में प्रस्तावित जनगणना प्रक्रिया को भी फिलहाल टाला गया है।
हालांकि, NRC को लेकर राज्य में मतभेद भी हैं। कुछ कुकी संगठनों ने इसका विरोध किया है और आशंका जताई है कि इससे कई परिवारों की नागरिकता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। वहीं समर्थक संगठनों का तर्क है कि अवैध प्रवासियों की पहचान से राज्य की वास्तविक जनसांख्यिकीय स्थिति स्पष्ट होगी।
मणिपुर पहले से ही जातीय संघर्ष और विस्थापन की चुनौती से जूझ रहा है। ऐसे में अवैध प्रवासियों की पहचान और NRC का मुद्दा राज्य की राजनीति और प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।





