बैंकाक। अमेरिकी नौसेना का परमाणु संचालित विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन 286 दिनों की लंबी तैनाती के बाद थाईलैंड पहुंचा है। लंबे समय तक समुद्र में रहने के कारण जहाज के बाहरी हिस्से पर जंग के निशान और फीका पड़ा पेंट साफ दिखाई दे रहा है। करीब 5,000 नाविकों और मरीन वाले इस पोत को अब थाईलैंड में कुछ दिनों के आराम और पुनः तैयार होने का मौका मिलेगा।
यूएसएस लिंकन बुधवार को पूर्वी थाईलैंड के लेम चाबांग बंदरगाह पहुंचा। यह तैनाती नवंबर 2025 में शुरू हुई थी और पोत ने इस दौरान लंबे समय तक लगातार समुद्र में रहकर मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया। अमेरिकी नौसेना के अनुसार, यह थाईलैंड में पोत का तैनाती शुरू होने के बाद पहला पूर्ण बंदरगाह पड़ाव है।
जहाज पर दिखे लंबे अभियान के निशान
286 दिनों तक समुद्र में रहने के बाद लिंकन और उसके साथ मौजूद अन्य अमेरिकी युद्धपोतों के पानी की सतह के आसपास जंग और खराब पेंट दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक समुद्री वातावरण में रहने से जहाजों पर इस तरह के निशान पड़ना असामान्य नहीं है। हालांकि, बाहरी हिस्से पर जंग दिखाई देने का मतलब यह नहीं है कि जहाज की युद्धक क्षमता प्रभावित हुई है। नियमित रखरखाव के लिए बंदरगाह पर पर्याप्त समय और संसाधनों की आवश्यकता होती है।
नाविकों को मिलेगा आराम
लंबी तैनाती के बाद अमेरिकी नौसैनिकों को थाईलैंड में आराम और मनोरंजन का अवसर दिया जा रहा है। कई नाविक और मरीन पटाया पहुंच चुके हैं। अमेरिकी नौसेना के अधिकारियों ने इस पड़ाव को कर्मचारियों के लिए आराम करने और दोबारा ऊर्जा हासिल करने का महत्वपूर्ण अवसर बताया है।
लंबी तैनाती के दौरान चालक दल की मानसिक स्थिति, भोजन और अन्य सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठे थे। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने हालांकि कई चिंताओं को लेकर अलग-अलग दावों को खारिज किया है।
थाईलैंड को भी आर्थिक लाभ की उम्मीद
करीब पांच हजार अमेरिकी सैन्यकर्मियों के पहुंचने से पटाया के स्थानीय कारोबारियों को भी आर्थिक लाभ की उम्मीद है। होटल, रेस्तरां और अन्य पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों को अमेरिकी नाविकों की मौजूदगी से बिक्री बढ़ने की उम्मीद है। थाईलैंड और अमेरिका लंबे समय से रक्षा सहयोगी हैं और दोनों देशों के बीच नियमित सैन्य अभ्यास भी होते हैं।





