नई दिल्ली। अदाणी समूह का कारोबार अब केवल भाजपा शासित राज्यों तक सीमित नहीं रह गया है। समूह कांग्रेस और अन्य गैर-भाजपा दलों की सरकार वाले राज्यों में भी बड़े पैमाने पर निवेश और परियोजनाओं का विस्तार कर रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सड़क, बंदरगाह, बिजली, नवीकरणीय ऊर्जा, सीमेंट और डेटा सेंटर समेत विभिन्न क्षेत्रों में करीब पांच लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं या उन पर काम चल रहा है।
कर्नाटक में 22,267 करोड़ की बोली
कांग्रेस शासित कर्नाटक में अदाणी एंटरप्राइजेज ने बेंगलुरु की प्रस्तावित 16.75 किलोमीटर लंबी उत्तर-दक्षिण सुरंग सड़क परियोजना के दोनों पैकेज के लिए सबसे कम बोली लगाई है। कंपनी ने 22,267 करोड़ रुपये की बोली दी है। हालांकि, परियोजना का ठेका अभी अंतिम रूप से नहीं दिया गया है। समूह की राज्य में पहले से ही उडुपी बिजली संयंत्र और मंगलुरु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में मौजूदगी है।
केरल और तेलंगाना में भी बड़े प्रोजेक्ट
केरल में अदाणी समूह ने विझिंजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह विकसित किया है। जनवरी 2026 में बंदरगाह के दूसरे चरण की शुरुआत हुई, जिसके लिए करीब 16,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त निवेश किया जा रहा है। समूह तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट का संचालन भी करता है।
तेलंगाना में कांग्रेस सरकार ने 2024 में अदाणी समूह की कंपनियों के साथ 12,400 करोड़ रुपये के निवेश के लिए चार समझौता ज्ञापन किए थे। इनमें डेटा सेंटर, ऊर्जा भंडारण, सीमेंट और रक्षा विनिर्माण जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।
तमिलनाडु, झारखंड और बिहार में भी विस्तार
तमिलनाडु में समूह ने 2024 में 42,700 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश संबंधी समझौते किए। वहीं चेन्नई आउटर रिंग रोड के संचालन, रखरखाव और टोल वसूली का ठेका भी समूह को मिला है।
झारखंड में अदाणी समूह 1,600 मेगावाट के गोड्डा बिजली संयंत्र का संचालन करता है। बिहार में समूह ने अगले तीन-चार वर्षों में 50,000 से 60,000 करोड़ रुपये निवेश करने की योजना बताई है। इसमें भागलपुर के पीरपैंती में 2,400 मेगावाट का ताप बिजली संयंत्र भी शामिल है।
राजनीतिक सीमाओं से आगे बढ़ता कारोबार
आंध्र प्रदेश में भी समूह की बंदरगाह, नवीकरणीय ऊर्जा और पारेषण क्षेत्रों में मौजूदगी बढ़ रही है। सूत्रों के अनुसार, बड़े और जटिल बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा करने की क्षमता के कारण विभिन्न राज्य सरकारें अदाणी समूह से निवेश आकर्षित कर रही हैं।
इससे संकेत मिलता है कि समूह की कारोबारी रणनीति अब राजनीतिक दलों की सरकारों की सीमाओं से आगे बढ़कर बुनियादी ढांचे, निवेश और रोजगार के अवसरों पर केंद्रित होती जा रही है।





