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नेपाल ने विदेशी राहत सहायता को दी मंजूरी, भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ; बचाव अभियान होगा तेज

काठमांडू। नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बीच काठमांडू सरकार ने अब विदेशी सहायता स्वीकार करने का फैसला किया है। शुरुआती तौर पर नेपाल ने विदेशी खोज एवं बचाव दलों की मदद लेने से इनकार किया था, लेकिन आपदा की भयावहता और प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों की चुनौती को देखते हुए रुख में बदलाव किया गया है।

भारत ने तुरंत शुरू की तैयारी

नेपाल की ओर से सहायता का रास्ता खुलने के बाद भारत ने भी तेजी से कदम उठाया है। भारत ने विशेष टनल रेस्क्यू टीम भेजने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए पहले एक रेकॉनिसेंस टीम नेपाल भेजी जा रही है, जो प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेकर आवश्यक उपकरणों और बचाव संसाधनों की जरूरत का आकलन करेगी।

भारत पहले ही नेपाल को मानवीय सहायता की कई खेप भेज चुका है। 28 अगस्त को भारत ने राहत सामग्री की तीसरी खेप के साथ डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मचारियों की टीम तथा बचाव अभियान के आकलन के लिए एक टीम भेजी। इससे पहले भी बड़ी मात्रा में आपदा राहत सामग्री नेपाल भेजी गई थी।

भारी तबाही, हजारों लोग प्रभावित

नेपाल के चीन सीमा से लगे इलाकों में आई अचानक बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। बाढ़ में कई बस्तियां तबाह हुई हैं और सड़क, पुल तथा जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

आपदा के बाद भारत के अलावा चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया और अन्य देशों ने भी नेपाल को सहायता की पेशकश की थी। नेपाल सरकार ने अब सीमित और जरूरत के मुताबिक विदेशी सहायता स्वीकार करने का संकेत दिया है।

नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। खराब मौसम और कई इलाकों तक पहुंचने में कठिनाई के बावजूद सुरक्षा एजेंसियां लापता लोगों की तलाश और प्रभावित नागरिकों तक राहत पहुंचाने में जुटी हैं।

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