नई दिल्ली। OBC क्रीमी लेयर के मानदंड को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका पर विशेष पीठ गठित करने पर विचार करने की सहमति दी है। मामला संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा-2025 के अभ्यर्थियों से जुड़ा है। केंद्र ने अदालत से मार्च 2026 के फैसले को CSE-2025 पर लागू करने को लेकर स्पष्टता मांगी है।
केंद्र सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि CSE-2025 में सफल 958 अभ्यर्थियों को सेवा आवंटन किया जाना है। इसके लिए सरकार चाहती है कि इन अभ्यर्थियों के मामले में OBC क्रीमी लेयर से जुड़े उन नियमों के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति मिले, जो सुप्रीम कोर्ट के 11 मार्च 2026 के फैसले से पहले लागू थे।
सुप्रीम कोर्ट ने मार्च में अपने फैसले में कहा था कि OBC क्रीमी लेयर का निर्धारण केवल माता-पिता की आय के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसमें सामाजिक और अन्य निर्धारित मानदंडों को भी ध्यान में रखना होगा। इस फैसले के बाद सरकारी सेवाओं में OBC आरक्षण की पात्रता को लेकर कई व्यावहारिक सवाल सामने आए हैं।
केंद्र का कहना है कि CSE-2025 के परिणाम और सेवा आवंटन की प्रक्रिया पहले ही आगे बढ़ चुकी है। ऐसे में नए मानदंडों के प्रभाव को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जरूरी हैं, ताकि अभ्यर्थियों के सेवा आवंटन में अनिश्चितता न रहे।
विशेष पीठ के गठन के बाद अदालत इस बात पर विचार कर सकती है कि मार्च के फैसले को CSE-2025 के चयनित अभ्यर्थियों पर किस तरह लागू किया जाए। इससे 958 अभ्यर्थियों के सेवा आवंटन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।
मामला OBC आरक्षण की पात्रता और क्रीमी लेयर के निर्धारण से जुड़े व्यापक प्रश्नों से भी जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के आगामी निर्देश से न केवल CSE-2025 के अभ्यर्थियों को राहत मिल सकती है, बल्कि भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं के लिए भी स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।





