नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी लोकसभा सांसदों की सदस्यता को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई की। कोर्ट ने पार्टी महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी की याचिका पर 20 सांसदों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में इन सांसदों के खिलाफ लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को निर्देश देने की मांग की गई है।
अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया है कि 20 सांसदों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर लंबे समय से फैसला नहीं हुआ है। TMC ने इन सांसदों के खिलाफ जून में अलग-अलग याचिकाएं लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष दाखिल की थीं। पार्टी का कहना है कि ये सांसद TMC के चुनाव चिह्न पर लोकसभा चुनाव जीतकर आए थे, लेकिन बाद में उन्होंने पार्टी से अलग रुख अपनाते हुए नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के साथ जुड़ने का दावा किया।
TMC का तर्क है कि सांसदों का दूसरे राजनीतिक गठन के साथ जाना संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दलबदल कानून के दायरे में आता है। पार्टी ने मांग की है कि अयोग्यता की याचिकाओं पर समयबद्ध तरीके से फैसला किया जाए।
वहीं, बागी सांसदों का दावा है कि उनका कदम वैध विलय के तहत आता है। 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से NCPI के साथ अपने विलय को मान्यता देने की मांग की है। इस विलय को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
इससे पहले अभिषेक बनर्जी ने 12 अगस्त को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर लंबित याचिकाओं पर जल्द निर्णय लेने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि यदि निर्धारित समय में फैसला नहीं हुआ तो वह सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अब 20 बागी सांसदों के जवाब और लोकसभा अध्यक्ष की ओर से मामले में उठाए जाने वाले अगले कदम पर नजर रहेगी। मामले में दलबदल कानून और सांसदों के कथित विलय की वैधता अहम मुद्दा बनी हुई है।




