नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने टेलीविजन चैनलों पर विज्ञापन प्रसारण को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब टीवी चैनलों के लिए हर घंटे अधिकतम 12 मिनट विज्ञापन दिखाने की अनिवार्य सीमा नहीं रहेगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 में संशोधन करते हुए इस प्रावधान को हटा दिया है। नया नियम 21 अगस्त 2026 को जारी राजपत्र अधिसूचना के साथ प्रभावी हो गया।
2006 में लागू हुआ था नियम
टेलीविजन पर विज्ञापन की 12 मिनट प्रति घंटे की सीमा वर्ष 2006 में लागू की गई थी। इसके तहत एक घंटे में अधिकतम 12 मिनट विज्ञापन प्रसारित किए जा सकते थे। इसमें करीब 10 मिनट व्यावसायिक विज्ञापनों और दो मिनट चैनल के अपने प्रचार के लिए निर्धारित थे। अब सरकार ने संबंधित प्रावधान को ही समाप्त कर दिया है।
बदल चुका है टीवी प्रसारण का बाजार
सरकार के अनुसार, 2006 के मुकाबले देश का टेलीविजन प्रसारण क्षेत्र काफी बदल गया है। उस समय देश में केवल 62 टीवी चैनल थे, जबकि अब इनकी संख्या 900 से अधिक हो चुकी है। इसके अलावा केबल टीवी का डिजिटलीकरण हो चुका है और डीटीएच, एचआईटीएस तथा आईपीटीवी जैसे डिजिटल वितरण माध्यम तेजी से बढ़े हैं।
मंत्रालय का तर्क है कि आज दर्शकों के पास मनोरंजन के कई विकल्प हैं और टीवी चैनलों के बीच प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है। डिजिटल मीडिया पर विज्ञापन अवधि को लेकर टीवी जैसी समान वैधानिक सीमा नहीं है। ऐसे में विज्ञापन सीमा हटाने से पारंपरिक टीवी प्रसारकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ प्रतिस्पर्धा करने में अधिक लचीलापन मिलेगा।
दर्शकों पर क्या पड़ेगा असर?
नियम हटने के बाद चैनलों को विज्ञापन स्लॉट और ब्रेक की अवधि तय करने में पहले से अधिक स्वतंत्रता मिलेगी। हालांकि इसका यह अर्थ नहीं है कि हर चैनल अनिवार्य रूप से ज्यादा विज्ञापन दिखाएगा। विज्ञापन की मात्रा चैनल की व्यावसायिक रणनीति, दर्शकों की पसंद और बाजार की मांग पर निर्भर करेगी।
सरकार के इस फैसले से टीवी उद्योग को विज्ञापन से होने वाली आय बढ़ाने के नए अवसर मिलने की उम्मीद है। वहीं दर्शकों के लिए विज्ञापन ब्रेक लंबे होने की संभावना को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।





