नई दिल्ली। भारत ने अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन की आपत्तियों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा है कि यह राज्य भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि किसी भी बाहरी दावे या कार्रवाई से अरुणाचल प्रदेश की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आ सकता।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भारत-चीन संबंधों को लेकर कहा कि दोनों देशों के बीच सीमा पर शांति और स्थिरता का व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर सीधा असर पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमा पर स्थिति जैसी होगी, उसका प्रभाव दोनों देशों के समग्र रिश्तों पर भी दिखाई देगा।
यह प्रतिक्रिया चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश में भारत द्वारा 27 स्थानों के मानक नामों के इस्तेमाल पर जताई गई आपत्तियों के बाद आई है। भारत पहले भी चीन के इस तरह के दावों को खारिज करता रहा है और अरुणाचल प्रदेश पर अपनी संप्रभुता को स्पष्ट करता रहा है।
विदेश मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना जरूरी है। सीमा विवाद के समाधान के लिए दोनों देशों के बीच विभिन्न स्तरों पर बातचीत और संवाद की प्रक्रिया जारी है।
हाल में भारत और चीन के अधिकारियों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की स्थिति, सीमा प्रबंधन और आपसी संपर्क को लेकर भी चर्चा हुई है। दोनों पक्षों ने सीमा पर गलतफहमियों को रोकने के लिए कूटनीतिक और सैन्य माध्यमों से संवाद बेहतर करने पर जोर दिया है।
भारत का ताजा रुख यह संकेत देता है कि सीमा से जुड़े मुद्दे दोनों देशों के रिश्तों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे। नई दिल्ली ने एक ओर अरुणाचल प्रदेश पर अपने अधिकार को दोहराया है, वहीं दूसरी ओर यह भी साफ किया है कि स्थिर और शांत सीमा ही भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक प्रगति का आधार बन सकती है।





