नई दिल्ली। सोशल मीडिया कंपनी मेटा (फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप की मूल कंपनी) पर एक रिपोर्ट में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी हर वर्ष स्कैम और फर्जी विज्ञापनों के जरिए अरबों डॉलर की कमाई कर रही है। दावा किया गया है कि मेटा के आंतरिक दस्तावेज बताते हैं कि उसके विज्ञापन राजस्व का बड़ा हिस्सा ऐसे विज्ञापनों से आता है, जिनमें निवेश धोखाधड़ी, फर्जी ई-कॉमर्स ऑफर, अवैध ऑनलाइन जुआ और प्रतिबंधित उत्पादों का प्रचार शामिल है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मेटा के प्लेटफॉर्म पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में संदिग्ध विज्ञापन दिखाए जाते हैं। कंपनी की आंतरिक समीक्षा के अनुसार, ऐसे “हाई-रिस्क” विज्ञापनों से उसे सालाना अरबों डॉलर का राजस्व प्राप्त होता है। इसके बावजूद इन विज्ञापनों को पूरी तरह रोकने में कंपनी की प्रणालियां प्रभावी साबित नहीं हुई हैं।
दस्तावेजों के अनुसार, मेटा केवल उन्हीं विज्ञापनदाताओं पर प्रतिबंध लगाती है, जिनके खिलाफ उसकी स्वचालित प्रणाली को लगभग पूर्ण विश्वास होता है कि वे धोखाधड़ी कर रहे हैं। जिन मामलों में संदेह तो होता है, लेकिन पर्याप्त प्रमाण नहीं मिलते, वहां कंपनी कई बार विज्ञापन जारी रहने देती है और उनसे अधिक शुल्क वसूलती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि कोई उपयोगकर्ता एक बार स्कैम विज्ञापन पर क्लिक करता है, तो एल्गोरिद्म उसे ऐसे और विज्ञापन दिखाने लगता है।
हालांकि मेटा ने इन आरोपों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि रिपोर्ट में इस्तेमाल किए गए आंतरिक आकलन प्रारंभिक और व्यापक अनुमान थे, जिनमें कई वैध विज्ञापन भी शामिल हो गए थे। कंपनी का दावा है कि वह धोखाधड़ी रोकने के लिए लगातार निवेश कर रही है और पिछले 18 महीनों में स्कैम विज्ञापनों से जुड़ी उपयोगकर्ताओं की शिकायतों में उल्लेखनीय कमी आई है। साथ ही 2025 के दौरान 13.4 करोड़ से अधिक स्कैम विज्ञापन सामग्री हटाई गई है।
रिपोर्ट के सामने आने के बाद मेटा की विज्ञापन निगरानी व्यवस्था और ऑनलाइन उपभोक्ता सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फर्जी विज्ञापनों पर सख्त नियंत्रण और प्रभावी नियामकीय निगरानी की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है।





