नई दिल्ली। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) अधिनियम-2026 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत ने याचिकाओं को स्वीकार करते हुए केंद्र से अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों पर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है।
याचिकाकर्ताओं का दावा है कि CAPF अधिनियम-2026 के कुछ प्रावधान सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों की भावना के विपरीत हैं और इससे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के ग्रुप ‘ए’ अधिकारियों के सेवा अधिकार तथा पदोन्नति संबंधी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उनका कहना है कि नया कानून संवैधानिक सिद्धांतों और न्यायालय द्वारा पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुरूप नहीं है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अधिनियम के क्रियान्वयन पर रोक लगाने से इनकार किया, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले के सभी संवैधानिक पहलुओं पर सुनवाई के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।
गौरतलब है कि CAPF अधिनियम-2026 को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के प्रशासन और सेवा संबंधी प्रावधानों में एकरूपता लाने के उद्देश्य से लागू किया गया था। हालांकि, इसके लागू होने के बाद से ही कुछ अधिकारी संगठनों और संबंधित पक्षों ने आरोप लगाया कि यह कानून पूर्व न्यायिक आदेशों के प्रभाव को सीमित करता है और सेवा संरचना में असंतुलन पैदा कर सकता है।
अब केंद्र सरकार के जवाब के बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले में विस्तृत सुनवाई करेगा। इस निर्णय पर न केवल CAPF अधिकारियों, बल्कि प्रशासनिक सेवा व्यवस्था से जुड़े अन्य पक्षों की भी नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की सेवा संरचना और प्रशासनिक ढांचे पर पड़ सकता है।





