नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के घोषित 1 करोड़ रुपये के लीगल डिफेंस फंड को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सूरत के आरटीआई कार्यकर्ता अमित तिवारी ने चुनाव आयोग (EC) और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) को पत्र लिखकर फंड की वैधता, संगठन की कानूनी स्थिति और उसके वित्तीय स्रोतों की जांच कराने की मांग की है।
आरटीआई कार्यकर्ता ने अपने पत्र में कहा है कि CJP यदि एक राजनीतिक दल की तरह कार्य कर रहा है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या उसका पंजीकरण जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत हुआ है। उन्होंने मांग की है कि यदि संगठन पंजीकृत नहीं है, तो उसके नाम पर धन जुटाने और उसके उपयोग की जांच की जानी चाहिए।
अमित तिवारी ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव दीपके की वित्तीय स्थिति की भी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि भगवानराव दीपके महाराष्ट्र सरकार के सेवानिवृत्त कर्मचारी रहे हैं और यह जांच होनी चाहिए कि उन्होंने अपने पुत्र की विदेश में उच्च शिक्षा का खर्च किस प्रकार वहन किया। उन्होंने संबंधित वित्तीय दस्तावेजों की भी जांच का आग्रह किया है।
इसके अलावा, उन्होंने CBIC से यह भी स्पष्ट करने की मांग की है कि प्रदर्शनकारियों की कानूनी सहायता के लिए घोषित 1 करोड़ रुपये के फंड पर वस्तु एवं सेवा कर (GST) के प्रावधान लागू होते हैं या नहीं। उनका कहना है कि यदि यह राशि सार्वजनिक रूप से एकत्र या संचालित की जा रही है, तो उसकी कर संबंधी स्थिति की भी जांच आवश्यक है।
गौरतलब है कि वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने हाल ही में CJP के लीगल डिफेंस फंड में 1 करोड़ रुपये देने की घोषणा की थी। यह फंड उन प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया है, जिनके खिलाफ विभिन्न मामलों में कार्रवाई की गई है। फिलहाल चुनाव आयोग और CBIC की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और जांच की मांग पर अभी निर्णय होना बाकी है।





