वॉशिंगटन: अमेरिका में भारतीय मूल के सांसदों ने भारत-विरोधी और प्रवासी समुदायों के खिलाफ बढ़ती नफरत और भेदभाव की घटनाओं पर चिंता जताते हुए इसके खिलाफ एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया है। डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद श्री थानेदार और राजा कृष्णमूर्ति ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय से सार्वजनिक जीवन और राजनीति में अधिक सक्रिय भागीदारी करने की अपील की है।
वॉशिंगटन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दोनों सांसदों ने कहा कि अमेरिका प्रवासियों के योगदान से मजबूत हुआ है और हर समुदाय को समान सम्मान और अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने भारतीय-अमेरिकी नागरिकों से स्थानीय, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर चुनावों में भाग लेने तथा प्रशासनिक व्यवस्था में अपनी भूमिका बढ़ाने का आग्रह किया।
श्री थानेदार ने कहा कि प्रवासी समुदायों की संस्कृति और पहचान का सम्मान करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि समाज में नफरत और भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। वहीं, राजा कृष्णमूर्ति ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय के खिलाफ होने वाली घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसी चुनौतियों का मुकाबला एकजुट होकर किया जाना चाहिए।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका के कुछ हिस्सों में भारतीय समुदाय को निशाना बनाए जाने की घटनाओं को लेकर चिंता बढ़ी है। इससे पहले कई भारतीय मूल के अमेरिकी सांसदों ने टेक्सास के फ्रिस्को में हुए भारत विरोधी प्रदर्शन और भारतीय ध्वज के अपमान की घटना की निंदा की थी। उन्होंने कहा था कि किसी भी समुदाय के खिलाफ नफरत और डर का माहौल स्वीकार नहीं किया जा सकता।
भारतीय-अमेरिकी नेताओं का मानना है कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ने से समुदाय की समस्याओं और चिंताओं को लोकतांत्रिक संस्थानों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाया जा सकेगा। उन्होंने युवाओं और प्रवासी भारतीयों से सार्वजनिक सेवा में आने और अमेरिकी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की आबादी और राजनीतिक प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में आव्रजन, भेदभाव, सांस्कृतिक पहचान और समुदाय से जुड़े मुद्दों पर भारतीय-अमेरिकी नेताओं की भूमिका आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो सकती है।





