चोलपोन-अता (किर्गिस्तान)। ईरान ने अमेरिका के दबाव और धमकियों के सामने झुकने से इनकार कर दिया है। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश किसी भी तरह के दबाव या बल प्रयोग की भाषा को स्वीकार नहीं करेगा।
अराघची ने बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ईरान अपनी जनता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका की नीति दबाव और धमकी पर आधारित है, जो दोनों देशों के बीच संवाद में सबसे बड़ी बाधा है।
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि तेहरान बातचीत और कूटनीति के खिलाफ नहीं है, लेकिन किसी भी वार्ता के लिए सम्मानजनक माहौल जरूरी है। उन्होंने दोहराया कि ईरान धमकियों के आधार पर कोई निर्णय नहीं लेगा और अपने हितों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक में अराघची ने सदस्य देशों से एकतरफा दबाव की नीतियों का विरोध करने और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के लिए देशों के बीच समानता और आपसी सम्मान पर आधारित संबंध जरूरी हैं।
बैठक के दौरान अराघची ने कई देशों के प्रतिनिधियों से द्विपक्षीय मुलाकातें भी कीं। उन्होंने पाकिस्तान, चीन और रूस के प्रतिनिधियों के साथ क्षेत्रीय मुद्दों और कूटनीतिक पहलों पर चर्चा की।
ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद जारी हैं। ऐसे समय में एससीओ मंच पर ईरान का यह बयान उसकी विदेश नीति के रुख को स्पष्ट करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान एससीओ जैसे बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से अपने राजनयिक संबंधों को मजबूत करने और पश्चिमी दबाव के मुकाबले वैकल्पिक साझेदारियां बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों पर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।





