नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) से जुड़े मामलों की लंबी सुनवाई पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे मामलों का समयबद्ध निपटारा न्याय व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि ट्रायल में अनावश्यक देरी से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है और लंबे समय तक जेल में रहने वाले आरोपितों की शिकायतों का समाधान भी अंतिम निर्णय के बाद ही संभव हो पाता है।
सीजेआई ने कहा कि दिल्ली दंगों सहित कई यूएपीए मामलों में सुनवाई अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही है। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे संवेदनशील मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए विशेष अदालतों (स्पेशल कोर्ट) की व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी और समयबद्ध बन सके।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यूएपीए जैसे मामलों में साक्ष्यों का अंतिम परीक्षण और ट्रायल पूरा होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे न्यायालय आरोपों की वास्तविकता पर अंतिम निष्कर्ष तक पहुंच सकेगा और लंबे समय से लंबित मामलों में न्याय सुनिश्चित होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्याय में अनावश्यक विलंब न केवल आरोपितों बल्कि न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता के लिए भी चुनौती है।
उन्होंने न्यायपालिका के समक्ष दूसरी बड़ी चुनौती ट्रिब्यूनलों की विश्वसनीयता को मजबूत करना बताया। सीजेआई ने कहा कि न्यायिक संस्थाओं में जनता का विश्वास बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए पारदर्शी तथा प्रभावी न्यायिक व्यवस्था आवश्यक है।
सीजेआई की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब देशभर में यूएपीए से जुड़े कई मामलों में सुनवाई और जमानत याचिकाओं में हो रही देरी को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। न्यायपालिका का मानना है कि इन मामलों के त्वरित निस्तारण से न्याय प्रक्रिया अधिक संतुलित, प्रभावी और भरोसेमंद बन सकेगी।





