बीजिंग/नई दिल्ली। तिब्बत में ब्रह्मपुत्र (यारलुंग सांगपो) नदी पर चीन द्वारा बनाए जा रहे दुनिया के सबसे बड़े जलविद्युत बांध को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं। चीन के सरकारी समर्थन प्राप्त भूवैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि प्रस्तावित बांध का क्षेत्र सक्रिय भ्रंश (फॉल्ट लाइन) पर स्थित है, जिससे भविष्य में भूकंप, भूस्खलन और संरचनात्मक अस्थिरता का खतरा बढ़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, बांध का निर्माण पूर्वी हिमालय के उस भूकंपीय क्षेत्र में किया जा रहा है, जहां धरती की सक्रिय हलचल लगातार दर्ज होती रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े जलाशय और भारी संरचना के कारण प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम बढ़ सकता है, जिससे परियोजना की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
यह परियोजना भारत के अरुणाचल प्रदेश के निकट स्थित है। ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत से निकलकर अरुणाचल प्रदेश और असम होते हुए बांग्लादेश पहुंचती है। ऐसे में किसी भी बड़े भूकंप, भूस्खलन या बांध से जुड़ी दुर्घटना का असर निचले क्षेत्रों तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना के भूगर्भीय जोखिमों के साथ-साथ इसके पर्यावरणीय और सामरिक प्रभावों पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। भारत पहले भी इस परियोजना को लेकर पारदर्शिता, जल प्रवाह और निचले क्षेत्रों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाता रहा है।
हालांकि चीन इस परियोजना को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और क्षेत्रीय विकास के लिए महत्वपूर्ण बता रहा है, लेकिन भूवैज्ञानिकों की ताजा चेतावनी ने इसकी दीर्घकालिक सुरक्षा और स्थिरता पर नई बहस छेड़ दी है।





