नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की संशोधित पाठ्यपुस्तक में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए संस्करण में एडोल्फ हिटलर और नाजी विचारधारा से जुड़े संदर्भ हटा दिए गए हैं। इसके साथ ही न्यायपालिका पर आधारित अध्याय को पूरी तरह संशोधित किया गया है और देश के विभाजन (Partition) को लेकर कांग्रेस के रुख की प्रस्तुति में भी बदलाव किया गया है।
संशोधित पुस्तक में न्यायपालिका संबंधी अध्याय को अधिक पारंपरिक नागरिक शास्त्र के स्वरूप में तैयार किया गया है। इसमें अब न्याय व्यवस्था, संवैधानिक उपचार, अदालतों की भूमिका, न्यायाधिकरणों और विवाद निपटान की प्रक्रिया पर प्रमुखता से जानकारी दी गई है। इससे पहले इस अध्याय को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद एनसीईआरटी ने संशोधन किया।
नई पुस्तक में भारत के विभाजन से जुड़े घटनाक्रम का विवरण भी बदला गया है। कांग्रेस की भूमिका को नए तरीके से प्रस्तुत किया गया है, जबकि कुछ नए ऐतिहासिक संदर्भ भी जोड़े गए हैं। इसके अलावा स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े अध्याय में हिटलर और नाजी विचारधारा का उल्लेख पूरी तरह हटा दिया गया है।
एनसीईआरटी की इन संशोधित पुस्तकों को लेकर एक बार फिर शिक्षा और इतिहास लेखन के विषय पर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाठ्यक्रम में किए गए बदलावों का असर विद्यार्थियों की ऐतिहासिक और नागरिक समझ पर पड़ेगा, वहीं इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने की संभावना है।





