नई दिल्ली। देश में एल नीनो के संभावित प्रभाव और खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने की, जिसमें 15 से अधिक मंत्रालयों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में राज्यों के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने और समय रहते आवश्यक कदम उठाने पर जोर दिया गया।
बैठक में भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने जून और जुलाई के मानसून की स्थिति तथा एल नीनो के संभावित प्रभावों की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि जुलाई और अगस्त के दौरान कमजोर से मध्यम स्तर का एल नीनो विकसित होने की संभावना है, जिससे कुछ क्षेत्रों में मानसून और कृषि गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
प्रधान सचिव ने निर्देश दिए कि कमजोर मानसून या वर्षा में देरी से प्रभावित होने वाले जिलों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए। साथ ही पेयजल की उपलब्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, जलाशयों के पानी का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने और आवश्यक होने पर राज्यों के साथ मिलकर राहत उपाय लागू करने को कहा गया।
कृषि मंत्रालय ने खरीफ फसलों की सुरक्षा के लिए तैयारियों का ब्यौरा प्रस्तुत किया। बताया गया कि 262 संवेदनशील जिलों के लिए जिला कृषि आकस्मिक योजना को अद्यतन किया गया है। इसके अलावा राज्यों के साथ नियमित ‘क्रॉप वेदर वॉच’ बैठकें आयोजित की जा रही हैं, ताकि मौसम की स्थिति के अनुसार त्वरित निर्णय लिए जा सकें। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड के दायरे को भी प्रभावित क्षेत्रों में बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
बैठक में पशुपालन विभाग को चारे की उपलब्धता का आकलन करने, स्वास्थ्य मंत्रालय को लू, अधिक आर्द्रता और डेंगू जैसी चुनौतियों से निपटने की तैयारियां मजबूत रखने तथा उपभोक्ता मामले एवं उर्वरक विभाग को आवश्यक वस्तुओं और खाद की उपलब्धता पर सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। सरकार ने स्पष्ट किया कि मौसम संबंधी अलर्ट और सलाह को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।





