नई दिल्ली। भारतीय मूल के कारोबारी गौरव श्रीवास्तव पर अमेरिकी खुफिया एजेंसी (CIA) का अधिकारी बनकर इंडोनेशिया में अरबों डॉलर की रक्षा खरीद से जुड़ी डील हासिल करने की कोशिश करने का आरोप लगा है। अंतरराष्ट्रीय खोजी संस्था OCCRP और इंडोनेशियाई मीडिया साझेदार टेम्पो की रिपोर्ट के बाद यह मामला चर्चा में आ गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, गौरव श्रीवास्तव ने कथित तौर पर स्वयं को CIA से जुड़ा अधिकारी बताकर इंडोनेशिया के तत्कालीन रक्षा मंत्री और वर्तमान राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ करीबी संबंध स्थापित किए। इस दौरान लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और अन्य सैन्य उपकरणों की खरीद से संबंधित कई प्रारंभिक सहमति पत्र (Letters of Intent) और समझौतों तक पहुंच बनाई गई।
हालांकि, इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ये केवल प्रारंभिक दस्तावेज थे और इनमें से कोई भी समझौता अंतिम रक्षा अनुबंध में तब्दील नहीं हुआ। मंत्रालय का कहना है कि रक्षा खरीद की सभी प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर संचालित की जाती हैं।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि श्रीवास्तव से जुड़ी कंपनियों के पास रक्षा खरीद का विशेष अनुभव नहीं था। वहीं, उनके पूर्व कारोबारी सहयोगी ने भी विभिन्न कानूनी मामलों में आरोप लगाया है कि श्रीवास्तव ने स्वयं को CIA से जुड़ा बताकर कारोबारी लाभ हासिल करने का प्रयास किया।
दूसरी ओर, गौरव श्रीवास्तव ने पहले ऐसे आरोपों को निराधार और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए खारिज किया है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पूर्व कारोबारी विवादों से प्रेरित हैं।
मामले के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रक्षा सौदों की पारदर्शिता और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल इस प्रकरण में किसी आपराधिक दोषसिद्धि की जानकारी सामने नहीं आई है और आरोपों की विभिन्न स्तरों पर जांच तथा समीक्षा जारी है।





