वाशिंगटन। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव और आर्थिक नीतियों से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में राष्ट्रपति Donald Trump को बड़ा झटका लगा है। देश की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of the United States ने दो महत्वपूर्ण मामलों में ऐसे निर्णय दिए हैं, जिन्हें ट्रंप के लिए राजनीतिक और कानूनी रूप से नुकसानदेह माना जा रहा है।
पहला मामला अमेरिकी केंद्रीय बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ा है, जिसमें फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता और नीतिगत फैसलों पर कार्यपालिका के प्रभाव को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने संकेत दिया कि Federal Reserve की स्वायत्तता को कमजोर करने के प्रयासों को स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस फैसले को आर्थिक संस्थानों की स्वतंत्रता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दूसरा मामला मेल बैलेट यानी डाक मतपत्रों से संबंधित था, जिसमें कुछ राज्यों की चुनावी प्रक्रियाओं को चुनौती दी गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मौजूदा चुनावी नियमों और प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं। इस फैसले से उन प्रयासों को झटका लगा है जिनमें मेल बैलेट की व्यवस्था को सीमित करने या बदलने की मांग की जा रही थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इन दोनों फैसलों से ट्रंप की उस रणनीति को धक्का लगा है, जिसमें वे संस्थागत ढांचे और चुनावी प्रक्रियाओं पर सवाल उठाते रहे हैं। अदालत के इन निर्णयों को अमेरिकी लोकतांत्रिक व्यवस्था और संस्थागत संतुलन के पक्ष में माना जा रहा है।
व्हाइट हाउस और रिपब्लिकन पार्टी की ओर से इस पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। जहां ट्रंप समर्थक इसे राजनीतिक असहमति से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं विरोधी दल इसे संवैधानिक संस्थाओं की मजबूती के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन फैसलों का असर आने वाले राष्ट्रपति चुनाव अभियान पर भी पड़ सकता है, क्योंकि यह मुद्दे लंबे समय से अमेरिकी राजनीति में बहस का केंद्र रहे हैं। विशेष रूप से मेल बैलेट व्यवस्था को लेकर पहले भी कई राज्यों में विवाद देखा गया है।
फिलहाल, अदालत के इन फैसलों के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है तथा आगामी चुनावी रणनीतियों पर इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है





