नई दिल्ली/ढाका। बांग्लादेश की तीस्ता नदी परियोजना को लेकर चीन ने एक बार फिर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि यह सहयोग पूरी तरह विकासात्मक है और इसका उद्देश्य किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है। यह बयान भारत द्वारा इस परियोजना को लेकर जताई गई सुरक्षा चिंताओं के बीच आया है।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि बांग्लादेश के साथ तीस्ता नदी प्रबंधन और पुनर्वास परियोजना में सहयोग दोनों देशों की आपसी सहमति और विकास आवश्यकताओं पर आधारित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह परियोजना ‘लिवलीहुड’ यानी स्थानीय जनता के जीवन-स्तर को सुधारने के उद्देश्य से है और इसमें किसी प्रकार की भू-राजनीतिक मंशा नहीं है।
तीस्ता नदी परियोजना को लेकर हाल के महीनों में बांग्लादेश और चीन के बीच सहयोग तेजी से बढ़ा है। इस परियोजना का उद्देश्य उत्तरी बांग्लादेश में बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई व्यवस्था और जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना है। चीन ने इसके लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता देने की पेशकश की है।
हालांकि, इस परियोजना को लेकर भारत में चिंता जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर (जिसे ‘चिकन नेक’ कहा जाता है) के बेहद नजदीक स्थित है, जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील भू-भाग है।
भारत की चिंताओं के जवाब में चीन ने कहा है कि उसकी नीतियां हमेशा पारदर्शी और विकास-केंद्रित रही हैं। बीजिंग ने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश के साथ उसका सहयोग किसी भी तीसरे देश को लक्षित नहीं करता और यह अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत है।
इधर, बांग्लादेश ने भी तीस्ता परियोजना को अपने जल संसाधन प्रबंधन के लिए बेहद अहम बताया है। ढाका का कहना है कि लंबे समय से लंबित जल-वितरण समझौतों और बाढ़ नियंत्रण की चुनौतियों को देखते हुए इस परियोजना को आगे बढ़ाना आवश्यक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना दक्षिण एशिया में जल कूटनीति (Water Diplomacy) के नए चरण की ओर इशारा करती है, जहां क्षेत्रीय सहयोग और प्रतिस्पर्धा दोनों एक साथ देखने को मिल रहे हैं।





