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उत्तराखंड में कुदरत का अनोखा करिश्मा: हल्द्वानी में जन्मी दो मुंह, चार आंखें और तीन कान वाली बछिया

उत्तराखंड के हल्द्वानी से एक बेहद हैरान और कौतूहल पैदा करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक गाय ने एक ऐसी अनोखी बछिया को जन्म दिया है जिसके दो मुंह, चार आंखें और तीन कान हैं। इस खबर के फैलते ही इलाके में बछिया को देखने के लिए लोगों का तांता लग गया है।
यह अनोखा मामला उत्तराखंड के नैनीताल जिले के हल्द्वानी के अंतर्गत आने वाले गोरापड़ाव क्षेत्र का है। यहां रहने वाले एक पशुपालक की गाय ने इस विचित्र बछिया को जन्म दिया। जन्म के समय बछिया के शारीरिक रूप को देखकर खुद पशुपालक और उनका परिवार दंग रह गया। दो मुंह और चार आंखों वाली इस बछिया के जन्म की खबर जैसे ही आसपास के गांवों में फैली, इसे देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

प्रसव के दौरान आई काफी मुश्किलें

पशुपालक के अनुसार, बछिया के दो सिर (आंशिक रूप से जुड़े हुए) होने के कारण गाय को प्रसव (delivery) के समय काफी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा। स्थिति बिगड़ती देख तुरंत पशु चिकित्सक को बुलाया गया। पशु चिकित्सक ने काफी मशक्कत और सूझबूझ के बाद बेहद मुश्किल से सुरक्षित प्रसव कराया। राहत की बात यह है कि जन्म के बाद जन्मदात्री गाय और बछिया दोनों ही पूरी तरह सुरक्षित हैं।

शारीरिक रूप से सामान्य नहीं है स्थिति

भले ही बछिया फिलहाल स्वस्थ बताई जा रही है और अपनी मां का दूध भी पी रही है, लेकिन दो सिरों के भारी वजन के कारण वह अपने शरीर का भार नहीं उठा पा रही है। उसे अपनी गर्दन सीधी रखने और खड़े होने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पशुपालक उसकी देखरेख में जुटे हुए हैं।

क्या कहते हैं वैज्ञानिक और डॉक्टर?

वरिष्ठ पशु चिकित्सकों के अनुसार, जीव विज्ञान और पशु चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को ‘पॉलीसिफेली’ (Polycephaly) कहा जाता है।

डॉक्टरों का स्पष्टीकरण: गर्भधारण के दौरान जब गर्भाशय के अंदर जाइगोट या भ्रूण (Embryo) बनता है, तो कभी-कभी कोशिकाओं (Cells) के असामान्य विभाजन के कारण वह पूरी तरह दो भागों में अलग नहीं हो पाता। इस स्थिति में शरीर तो एक ही रहता है, लेकिन सिर का हिस्सा आंशिक या पूर्ण रूप से दो भागों में विकसित हो जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि यह एक दुर्लभ जेनेटिक म्यूटेशन (आनुवंशिक विकृति) है और इसे किसी प्रकार का अंधविश्वास या दैवीय चमत्कार नहीं माना जाना चाहिए। ऐसे मामलों में जीवों का लंबे समय तक जीवित रहना काफी कठिन होता है।

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