मुंबई/नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट को बड़ा झटका लगा है, जहां उसके छह लोकसभा सांसदों के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना खेमे में शामिल होने की खबर है। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है और आगामी मानसून सत्र से पहले शक्ति संतुलन बदलने के संकेत मिल रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, ये छह सांसद पहले ही लोकसभा में अलग समूह के रूप में अपनी गतिविधियां दर्ज करा चुके हैं और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भी सौंपा गया है। माना जा रहा है कि ये सांसद जल्द ही औपचारिक रूप से शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं। इस घटनाक्रम को “ऑपरेशन टाइगर” से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसके तहत शिंदे खेमे द्वारा ठाकरे गुट में सेंध लगाने की कोशिशें लंबे समय से चल रही थीं।
बताया जा रहा है कि इन सांसदों की नाराजगी संगठनात्मक कामकाज, क्षेत्रीय विकास से जुड़ी अपेक्षाओं और नेतृत्व से संवाद की कमी को लेकर बढ़ी थी। वहीं शिंदे गुट का दावा है कि उनके संपर्क में कई और सांसद एवं विधायक भी हैं, जो भविष्य में पाला बदल सकते हैं।
इस बीच ठाकरे गुट में बेचैनी बढ़ गई है। पार्टी नेतृत्व ने दिल्ली में बैठक बुलाकर स्थिति की समीक्षा की है और अनुपस्थित सांसदों पर कार्रवाई की चर्चा भी शुरू हो गई है। वहीं शिंदे खेमे ने इस घटनाक्रम को “जनाधार का उनके पक्ष में झुकाव” बताया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए शक्ति-संतुलन की ओर इशारा करता है, जिससे लोकसभा में भी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। आने वाले दिनों में इस मामले पर और स्पष्टता आने की संभावना है, लेकिन फिलहाल यह पूरा प्रकरण शिवसेना (UBT) के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, छह सांसदों के संभावित दल-बदल ने महाराष्ट्र की सियासत को एक बार फिर उथल-पुथल के दौर में ला दिया है।





