नई दिल्ली। भारत की ऊर्जा जरूरतों के बीच रूस से कच्चे तेल के आयात में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में भारत का रूस से तेल आयात 21 प्रतिशत बढ़ गया है, जिससे देश की रूस पर निर्भरता और अधिक मजबूत होती दिखाई दे रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक बाजार में अस्थिरता और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारत ने सस्ते और स्थिर आपूर्ति विकल्प के रूप में रूस से आयात को प्राथमिकता दी है। इससे देश की रिफाइनरी कंपनियों को लागत नियंत्रण में मदद मिल रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में बड़े बदलाव हुए हैं, जिसके चलते भारत ने अपनी ऊर्जा नीति में रणनीतिक संतुलन अपनाया है। रूस से मिलने वाला कच्चा तेल कई बार अन्य आपूर्तिकर्ता देशों की तुलना में सस्ता पड़ता है, जिससे आयात बढ़ा है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और ऐसे में किफायती स्रोतों की ओर रुख करना आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, बढ़ती निर्भरता को लेकर वैश्विक स्तर पर निगरानी भी बढ़ी है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विभिन्न देशों से आपूर्ति स्रोतों का विविधीकरण (डाइवर्सिफिकेशन) कर रहा है, ताकि किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता न रहे।
मई में दर्ज यह 21 प्रतिशत की वृद्धि यह संकेत देती है कि आने वाले समय में रूस भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रख सकता है।





