नई दिल्ली | मीडिया डेस्क रिपोर्ट
संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति ने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं को लेकर राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से कड़े सवाल किए हैं। समिति ने विशेष रूप से एनटीए से “पेपर लीक” की स्पष्ट परिभाषा तय करने और वर्ष 2018 से अब तक हुई परीक्षाओं में किसी भी तरह की लीक की जानकारी देने को कहा है।
सूत्रों के अनुसार, समिति ने यह भी पूछा है कि क्या एनटीए ने अपने सिस्टम में किसी भी प्रकार की अनियमितता या पेपर लीक की स्वतंत्र जांच कराई है, जबकि कई मामलों की जांच पहले से केंद्रीय एजेंसियां कर रही हैं।
समिति ने एनटीए से पिछले तीन वर्षों की कार्यप्रणाली, कर्मचारियों की संख्या, तथा 2022 के बाद की नई भर्तियों का पूरा ब्योरा भी तलब किया है। इसके साथ ही परीक्षा सुधार से जुड़े राधाकृष्णन समिति की 101 सिफारिशों पर एजेंसी द्वारा की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी गई है।
इसी बैठक में CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए। समिति ने पूछा कि टेंडर प्रक्रिया में बदलाव क्यों किए गए, चयन मानदंडों में ढील क्यों दी गई और तकनीकी शर्तों में संशोधन का क्या औचित्य था।
विशेष रूप से यह भी पूछा गया कि उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग गुणवत्ता से जुड़े मानकों में बदलाव क्यों किया गया, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं।
देश में हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों को लेकर लगातार विवाद बढ़ा है। इसी पृष्ठभूमि में संसद की यह समिति परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था की समीक्षा कर रही है।
समिति ने एनटीए और सीबीएसई दोनों से निर्धारित समय सीमा के भीतर लिखित जवाब मांगा है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई या सिफारिशें तय की जाएंगी।





