देहरादून। उत्तराखंड में ट्रांसफर एक्ट के तहत विभागों में कर्मचारी तबादलों की प्रक्रिया धीमी पड़ने से विवाद और असंतोष बढ़ गया है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, कई विभागों में लंबित तबादलों के कारण कर्मचारियों को उनकी इच्छानुसार या आवश्यकतानुसार पोस्टिंग नहीं मिल पा रही है।
सूत्रों का कहना है कि कुछ मामलों में कर्मचारियों को सालों तक स्थानांतरण का इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि नीति के अनुसार इसे शीघ्र पूरा करना चाहिए। इस धीमी प्रक्रिया से विभागीय कार्यों में भी असर पड़ रहा है और कई क्षेत्रों में प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
सरकारी अधिकारी बताते हैं कि तबादलों में देरी के पीछे कागजी प्रक्रिया, अनुमोदन में विलंब और समन्वय की कमी मुख्य कारण हैं। इसके अलावा, राजनीतिक और स्थानीय दबाव भी कभी–कभी प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं।
कर्मचारी संघों ने इस स्थिति पर नाराजगी जताई है और कहा कि उन्हें लगातार असमंजस और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। संघों का मानना है कि यदि तबादलों में सुधार नहीं किया गया, तो इसका प्रभाव कर्मचारियों की कार्यक्षमता और प्रशासनिक अनुशासन पर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य में कर्मचारियों का सही समय पर स्थानांतरण आवश्यक है, ताकि प्रशासनिक कार्य सुचारु रूप से चले और स्थानीय जनता को सेवाओं में बाधा न आए।
सरकार ने कहा है कि इस मुद्दे को गंभीरता से देखा जा रहा है और जल्द ही ट्रांसफर प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। इससे न केवल प्रक्रिया में तेजी आएगी, बल्कि कर्मचारियों का विश्वास भी बढ़ेगा।
कुल मिलाकर, ट्रांसफर एक्ट के तहत विभागों में तबादलों की सुस्ती अब प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है और सुधार के लिए अधिकारियों को दबाव का सामना करना पड़ रहा है।





