नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पहली बार मंत्रालयों और विभागों के कामकाज का व्यापक प्रदर्शन मूल्यांकन किया है। इस समीक्षा में कई मंत्रालयों को ‘संतोषजनक’ श्रेणी में रखा गया, जबकि कुछ विभागों के प्रदर्शन पर सुधार की जरूरत बताई गई है। सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाना और कामकाज में तेजी लाना बताया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, मंत्रालयों का मूल्यांकन फाइलों के निस्तारण, जन शिकायतों के समाधान, कैबिनेट नोट्स पर समयबद्ध प्रतिक्रिया और प्रशासनिक दक्षता जैसे मानकों पर किया गया। यह समीक्षा हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रस्तुत की गई।
रिपोर्ट में उपभोक्ता मामले, कोयला, बिजली और स्वास्थ्य मंत्रालय को बेहतर प्रदर्शन करने वाले विभागों में शामिल किया गया है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय को शिकायत निवारण और पश्चिम एशिया संकट से जुड़े मुद्दों के प्रबंधन में सराहना मिली, जबकि कोयला मंत्रालय को फाइल निपटान और प्रशासनिक प्रबंधन में बेहतर बताया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में मंत्रियों को विकास कार्यों में तेजी लाने, नियमों को सरल बनाने और आम नागरिकों के जीवन को आसान बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य “न्यूनतम हस्तक्षेप, अधिकतम समर्थन” की नीति के साथ काम करना है।
बैठक के बाद कई मंत्रालयों ने अपने-अपने विभागों में सुधार और प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए समीक्षा बैठकें शुरू कर दी हैं। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को फाइल प्रक्रिया सरल करने और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के निर्देश दिए।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि भविष्य में इस तरह की प्रदर्शन समीक्षा नियमित रूप से की जाएगी, ताकि मंत्रालयों के कामकाज में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाई जा सके। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम सरकार की कार्यशैली को अधिक परिणाम आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





