प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नॉर्वे दौरे के दौरान मानवाधिकार संबंधी सवाल उठाए जाने पर भारत ने स्पष्ट और कड़ा जवाब दिया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों के समान अधिकार सुनिश्चित करता है और मानवाधिकारों की रक्षा इसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि “हमारे संवैधानिक ढांचे में सभी नागरिकों को मौलिक अधिकार प्राप्त हैं। भारत लोकतंत्र और कानून के शासन पर आधारित है और मानवाधिकारों की रक्षा में प्रतिबद्ध है।”
उन्होंने यह भी कहा कि भारत के आंतरिक मामलों पर किसी बाहरी देश की टिप्पणियाँ उचित नहीं हैं। मंत्रालय ने भारत के संवैधानिक ढांचे और न्यायिक प्रणाली की मजबूती का हवाला देते हुए कहा कि देश में सभी धर्म, जाति और वर्ग के लोगों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है।
नॉर्वे दौरे के दौरान पीएम मोदी ने वहां की सरकार और जनता से कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की, जिसमें आर्थिक सहयोग, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक सुरक्षा शामिल थे। इस दौरे के दौरान मानवाधिकार सवाल उठाए जाने की घटना ने कूटनीतिक मंच पर हल्की–फुल्की चर्चा का माहौल बनाया।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस जवाब से भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह अपने आंतरिक मामलों और संवैधानिक अधिकारों के संबंध में किसी भी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं करेगा।
विदेश मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हमेशा मानवाधिकारों के समर्थन में रहा है और विभिन्न देशों के साथ सहयोग को बढ़ावा देता है।





