नई दिल्ली/वॉशिंगटन। भारत द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान की गतिविधियों को लेकर एक अमेरिकी रिपोर्ट ने नई चिंताएँ पैदा कर दी हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान अब आतंकी ढांचे को फिर से खड़ा करने और क्षतिग्रस्त ठिकानों की मरम्मत में जुटा हुआ है।
अमेरिकी सुरक्षा विश्लेषण से जुड़ी रिपोर्ट के अनुसार, हालिया सैन्य दबाव और कार्रवाई के बाद पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों के कई ठिकानों को नुकसान पहुंचा था। अब इन ठिकानों को दोबारा सक्रिय करने के प्रयास तेज किए जा रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों और नियंत्रण रेखा के आसपास गतिविधियां फिर बढ़ती दिखाई दे रही हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकवादी नेटवर्क को अस्थायी झटका जरूर लगा, लेकिन संरचनात्मक स्तर पर उसे पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सका। इसी वजह से आतंकी ढांचे की मरम्मत, लॉजिस्टिक सपोर्ट और प्रशिक्षण सुविधाओं को फिर बहाल करने की कोशिशें जारी हैं।
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि कुछ आतंकी संगठनों ने अपने ऑपरेशनल मॉडल में बदलाव किया है। बड़े कैंपों की जगह छोटे और बिखरे हुए ठिकानों का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है ताकि निगरानी और सैन्य कार्रवाई से बचा जा सके।
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान की यह रणनीति ‘लो-प्रोफाइल पुनर्निर्माण’ की हो सकती है, जिसमें सार्वजनिक गतिविधि कम रखते हुए धीरे-धीरे नेटवर्क को पुनर्जीवित किया जाता है। इससे क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियाँ फिर बढ़ सकती हैं।
भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान पर आतंकवाद को संरक्षण देने के आरोप लगाता रहा है। नई अमेरिकी रिपोर्ट को उसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह संकेत देती है कि सीमा पार आतंकी ढांचे को लेकर खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
हालांकि पाकिस्तान की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी और कड़ी हो सकती है।
रिपोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई केवल सैन्य स्तर पर नहीं, बल्कि कूटनीतिक और वित्तीय दबाव के जरिए भी जारी रखना आवश्यक होगा, ताकि आतंकी संरचनाओं को दोबारा मजबूत होने से रोका जा सके।





