वॉशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की महत्वाकांक्षी मिसाइल रक्षा परियोजना ‘गोल्डन डोम’ को लेकर लागत संबंधी चिंताएं तेज हो गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार इस विशाल रक्षा कार्यक्रम पर अगले 20 वर्षों में करीब 12 ट्रिलियन डॉलर तक खर्च आने का अनुमान लगाया जा रहा है, जिससे अमेरिकी रक्षा बजट और आर्थिक प्राथमिकताओं पर नई बहस शुरू हो गई है।
‘गोल्डन डोम’ परियोजना का उद्देश्य अमेरिका को बैलिस्टिक, हाइपरसोनिक और उन्नत क्रूज़ मिसाइलों सहित भविष्य के हवाई खतरों से सुरक्षित करना है। इस प्रणाली को बहु-स्तरीय राष्ट्रीय मिसाइल रक्षा कवच के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है, जिसमें अंतरिक्ष आधारित हथियारों और जमीन पर तैनात रक्षा प्रणालियों का संयोजन शामिल होगा।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इस परियोजना के तहत सैटेलाइट नेटवर्क, इंटरसेप्टर मिसाइल सिस्टम और नई निगरानी तकनीकों को एकीकृत किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में इसकी लागत लगभग 175 अरब डॉलर आंकी गई थी, लेकिन दीर्घकालिक संचालन, तकनीकी उन्नयन और रखरखाव को जोड़ने पर कुल खर्च कई गुना बढ़ सकता है।
अमेरिकी कांग्रेस के बजट विश्लेषकों और रक्षा नीति विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्तर की रक्षा प्रणाली को पूरी तरह विकसित करने में दशकों का समय लग सकता है। कुछ आकलनों के मुताबिक परियोजना की कुल लागत कम से कम 500 अरब डॉलर से शुरू होकर लंबी अवधि में कई ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है।
समर्थकों का तर्क है कि चीन और रूस जैसी सैन्य शक्तियों से बढ़ते मिसाइल खतरे को देखते हुए अमेरिका को उन्नत रक्षा ढांचा तैयार करना आवश्यक है। वहीं आलोचकों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि सामाजिक योजनाओं, बुनियादी ढांचे और आर्थिक सुधारों पर दबाव बढ़ा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘गोल्डन डोम’ केवल सैन्य परियोजना नहीं बल्कि भविष्य के युद्धों की रणनीति का संकेत भी है, जहां अंतरिक्ष आधारित रक्षा प्रणाली वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है।
यदि यह परियोजना पूरी तरह लागू होती है, तो यह शीत युद्ध काल के बाद अमेरिका की सबसे महंगी रक्षा पहल साबित हो सकती है और वैश्विक हथियार प्रतिस्पर्धा को भी नई दिशा दे सकती है।





