देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऊर्जा संसाधनों के संरक्षण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए कहा कि ऊर्जा बचाना केवल सरकार का नहीं बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने राज्य में ऊर्जा दक्षता और संसाधनों के संतुलित उपयोग पर विशेष बल दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बढ़ती ऊर्जा मांग और सीमित प्राकृतिक संसाधनों को देखते हुए ऊर्जा संरक्षण की दिशा में जनभागीदारी बेहद आवश्यक है। यदि नागरिक स्तर पर बिजली और अन्य ऊर्जा स्रोतों के उपयोग में सावधानी बरती जाए तो भविष्य की ऊर्जा चुनौतियों से काफी हद तक निपटा जा सकता है।
उन्होंने अधिकारियों और संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि ऊर्जा बचत से जुड़े कार्यक्रमों को गांव-गांव और शहर-शहर तक पहुंचाया जाए। विद्यालयों, सरकारी संस्थानों और औद्योगिक इकाइयों में ऊर्जा दक्ष उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। सौर ऊर्जा, जल विद्युत और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के विस्तार से न केवल पर्यावरण संरक्षण होगा बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी राज्य आगे बढ़ेगा।
उन्होंने आम जनता से अपील की कि अनावश्यक बिजली उपयोग से बचें, ऊर्जा कुशल उपकरण अपनाएं और दैनिक जीवन में ऊर्जा बचत की आदत विकसित करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े परिणाम दे सकते हैं और इससे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सकेगा।
राज्य सरकार द्वारा ऊर्जा संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में जागरूकता अभियान चलाने की भी योजना बनाई जा रही है, ताकि समाज के सभी वर्ग इस पहल से जुड़ सकें।





