अमेरिका में एक चौंकाने वाली घटना ने विमानन सुरक्षा और यात्रियों की देखभाल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्पिरिट एयरलाइंस पर आरोप लगा है कि उसने डिमेंशिया से पीड़ित एक बुजुर्ग यात्री को एयरपोर्ट पर बिना सहायता के छोड़ दिया, जिसके बाद उनकी सड़क दुर्घटना में मौत हो गई।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 75 वर्षीय मार्कोस हम्बर्टो विंडेल ओसोरियो होंडुरास से टेक्सास के ह्यूस्टन स्थित जॉर्ज बुश इंटरकॉन्टिनेंटल एयरपोर्ट पहुंचे थे। परिवार ने पहले ही एयरलाइन को उनकी मानसिक स्थिति के बारे में जानकारी दी थी और आगमन के बाद विशेष सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था।
परिजनों का आरोप है कि एयरलाइन अधिकारियों ने सहायता देने का आश्वासन तो दिया, लेकिन ह्यूस्टन पहुंचने पर बुजुर्ग यात्री को बिना किसी निगरानी या सहायता के छोड़ दिया गया। बताया गया कि वह एयरपोर्ट से बाहर निकल गए और रास्ता भटकते हुए हाईवे तक पहुंच गए।
कुछ घंटों बाद उन्हें एयरपोर्ट से कई किलोमीटर दूर सड़क पर मृत पाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें कई वाहनों ने टक्कर मारी थी। परिवार का कहना है कि यदि एयरलाइन ने तय सहायता उपलब्ध कराई होती तो यह हादसा टाला जा सकता था।
इस मामले में मृतक के परिवार ने एयरलाइन के खिलाफ लापरवाही और गंभीर जिम्मेदारी उल्लंघन का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया है। कानूनी याचिका में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा नियमों के तहत विशेष जरूरत वाले यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना एयरलाइन की जिम्मेदारी होती है।
घटना ने विमानन कंपनियों द्वारा बुजुर्ग और विशेष सहायता वाले यात्रियों के प्रबंधन पर व्यापक बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि एयरलाइंस को ऐसे मामलों में निगरानी और सहायता व्यवस्था को और सख्त बनाने की आवश्यकता है।
फिलहाल एयरलाइन की ओर से मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की गई है, जबकि अदालत में सुनवाई की प्रक्रिया जारी है।
यह मामला वैश्विक स्तर पर यात्रियों की सुरक्षा और एयरलाइन जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनता जा रहा है।





