देहरादून।
उत्तराखंड में बढ़ते पलायन को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंभीर चिंता जताई है। देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि पहाड़ों से हो रहा पलायन केवल कृषि भूमि को ही बंजर नहीं बना रहा, बल्कि इससे स्थानीय संस्कृति, परंपराएं और सामाजिक विरासत भी प्रभावित हो रही हैं।
सीएम योगी ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी समृद्ध लोकसंस्कृति, पारंपरिक जीवनशैली और गांव आधारित सामाजिक व्यवस्था से जुड़ी रही है। लेकिन लगातार हो रहे पलायन के कारण गांव खाली होते जा रहे हैं, जिससे सांस्कृतिक जीवन कमजोर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जब गांवों में लोग नहीं रहेंगे तो लोक परंपराएं, त्योहार, बोली-भाषा और सामाजिक संरचना भी धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है।
उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि विकास की योजनाएं ऐसी होनी चाहिए, जिससे लोगों को अपने गांवों में ही सम्मानजनक जीवन और रोजगार मिल सके। योगी आदित्यनाथ ने स्थानीय संसाधनों आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता बताई और कहा कि पर्यटन, कृषि, वन उत्पाद तथा पारंपरिक हस्तशिल्प पलायन रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ी राज्यों के सामने सबसे बड़ी चुनौती संतुलित विकास की है। यदि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और डिजिटल सुविधाएं गांव स्तर तक पहुंचेंगी तो पलायन की गति स्वतः कम हो सकती है। उन्होंने युवाओं को स्थानीय स्तर पर उद्यमिता से जोड़ने की भी आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने उत्तराखंड की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की सराहना करते हुए कहा कि यह क्षेत्र केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का जीवंत केंद्र भी है। इसलिए विकास योजनाओं में सांस्कृतिक संरक्षण को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।
सीएम योगी के अनुसार, पलायन रोकना केवल आर्थिक मुद्दा नहीं बल्कि सांस्कृतिक अस्तित्व से जुड़ा विषय है, जिस पर सरकार, समाज और युवाओं को मिलकर काम करना होगा।





