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 ईरान-अमेरिका वार्ता से उम्मीदें बढ़ीं, होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे 40 से अधिक भारतीय जहाजों को मिल सकती है राहत

नई दिल्ली।
मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच शुरू हुई कूटनीतिक बातचीत से वैश्विक समुद्री व्यापार को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे 40 से अधिक भारतीय जहाजों के लिए स्थिति सामान्य होने की संभावना बढ़ी है।

जानकारी के अनुसार, अमेरिका-ईरान टकराव और सैन्य गतिविधियों के कारण पिछले कुछ सप्ताह से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित रही। सुरक्षा जोखिम, नौसैनिक निगरानी और प्रतिबंधों के चलते कई देशों के व्यापारिक जहाज, जिनमें भारतीय पोत भी शामिल हैं, समुद्री मार्ग पर अटके रहे।

होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। अप्रैल 2026 में बढ़े सैन्य तनाव और अमेरिकी नौसैनिक कार्रवाई के बाद इस क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही बाधित हो गई थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और शिपिंग उद्योग पर व्यापक असर पड़ा।

सूत्रों के अनुसार, भारत से जुड़े 40 से अधिक जहाज—जिनमें तेल टैंकर और मालवाहक पोत शामिल हैं—सुरक्षा मंजूरी और स्थिर स्थिति का इंतजार कर रहे थे। भारतीय शिपिंग कंपनियों और सरकार ने लगातार हालात पर नजर बनाए रखी और जहाजों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी।

हालिया कूटनीतिक संपर्कों के बाद संकेत मिले हैं कि अमेरिका और ईरान तनाव कम करने के उपायों पर बातचीत कर रहे हैं। यदि वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो समुद्री मार्गों को चरणबद्ध तरीके से सामान्य किया जा सकता है, जिससे फंसे जहाजों को आगे बढ़ने की अनुमति मिल सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिरता लौटना न केवल भारत बल्कि वैश्विक व्यापार के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। इस मार्ग पर बाधा आने से कच्चे तेल की कीमतों, सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार लागत पर सीधा असर पड़ता है।

भारत सरकार स्थिति पर लगातार निगरानी रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर समुद्री सुरक्षा एजेंसियों तथा अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ समन्वय बनाए हुए है। फिलहाल सभी की नजर अमेरिका-ईरान वार्ता के नतीजों पर टिकी है, जिनसे क्षेत्र में तनाव कम होने और भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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