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दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिर में गूंजा ‘हर-हर महादेव’: तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट खुले; पहले ही दिन हजारों भक्तों ने किया जलाभिषेक

रुद्रप्रयाग/चोपता: हिमालय की चोटियों पर स्थित विश्व के सबसे ऊंचे शिवालय, तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम के कपाट बुधवार को ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए गए हैं। समुद्रतल से 12,073 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस पौराणिक मंदिर के द्वार सुबह 11 बजे शुभ मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चार और भारी जनसमूह के जयघोष के बीच खोले गए। कपाट खुलने के साथ ही पंच केदारों में शुमार बाबा तुंगनाथ की छह माह की हिमालयी पूजा शुरू हो गई है, जिससे रुद्रप्रयाग जनपद के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में एक बार फिर धार्मिक रौनक लौट आई है।

चोपता से तुंगनाथ तक भक्तिमय सफर

कपाट उद्घाटन की प्रक्रिया परंपरा के अनुसार भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली के आगमन के साथ शुरू हुई।

  • भव्य विदाई: सुबह श्रृंगार और विशेष आरती के बाद बाबा की डोली अपने शीतकालीन पड़ाव के पड़ाव स्थल, भूतनाथ मंदिर (चोपता) से प्रस्थान कर सुरम्य बुग्यालों के बीच से होते हुए धाम की ओर बढ़ी।
  • धूमधाम से आगवानी: सुबह ठीक 10 बजे बाबा की डोली तुंगनाथ मंदिर परिसर पहुँची। यहाँ पहले से ही प्रतीक्षा कर रहे भक्तों ने पुष्पों और अक्षत के साथ डोली की भव्य आगवानी की। ढोल-दमाऊ की थाप और स्थानीय लोक गीतों ने वातावरण को अलौकिक बना दिया।

कपाट उद्घाटन की पौराणिक परंपरा

मंदिर परिसर पहुँचने के बाद डोली ने मंदिर की तीन परिक्रमाएं पूर्ण कीं और बाबा को शीश नवाया।

  • द्वार उद्घाटन: ठीक 11 बजे मंदिर के मुख्य द्वार खोले गए। कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं ने स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन किए।
  • प्रथम अभिषेक: पहले ही दिन एक हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर बाबा का जलाभिषेक किया और देश की सुख-समृद्धि व विश्व शांति के लिए प्रार्थना की।

आसपास के क्षेत्रों में लौटी आर्थिक और धार्मिक रौनक

तुंगनाथ धाम के कपाट खुलने का सीधा असर स्थानीय जनजीवन पर भी पड़ा है।

  1. व्यापार में तेजी: कपाट खुलने के साथ ही चोपता, बनियाकुंड और दुगलबिट्टा जैसे पर्यटन स्थलों और छोटे कस्बों में रौनक लौट आई है। शीतकाल के दौरान यहाँ सन्नाटा पसरा रहता था, लेकिन अब होटल, होमस्टे और ढाबा संचालकों के चेहरे खिल गए हैं।
  2. श्रद्धालुओं का उत्साह: पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू होने से स्थानीय गाइड और घोड़ा-खच्चर संचालकों को भी रोजगार मिलने लगा है।

हिमालयी सौंदर्य और कठिन चढ़ाई

तुंगनाथ की यात्रा अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन 12 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई होने के कारण यहाँ ऑक्सीजन की कमी और कड़ाके की ठंड रहती है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए ही इस चढ़ाई को चढ़ें।

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