Top 5 This Week

Related Posts

उत्तराखंड में 25 अप्रैल से शुरू होगी भवन गणना; हॉस्टल और पीजी मालिकों के नाम से दर्ज होगा डेटा, किराएदारों की केवल संख्या पूछी जाएगी

देहरादून: उत्तराखंड सरकार के निर्देशानुसार प्रदेश भर में आगामी 25 अप्रैल से महत्वपूर्ण भवन गणना का कार्य शुरू होने जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत राज्य के प्रत्येक भवन, हॉस्टल और पीजी (पेइंग गेस्ट) की विस्तृत जानकारी जुटाई जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हॉस्टल, पीजी या किराये पर दिए गए कमरों की गणना संबंधित मकान मालिक या उस बिल्डिंग के अधिकृत मैनेजर के नाम पर की जाएगी। इस मुहिम का उद्देश्य राज्य के बुनियादी ढांचे और रिहायशी स्थिति का सटीक डेटा तैयार करना है।

किरायेदारों के लिए नियम: व्यक्तिगत जानकारी के बजाय संख्या पर जोर

भवन गणना के दौरान उन लोगों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं जो अपने घरों से दूर किराये के कमरों या हॉस्टल में रह रहे हैं।

  • मालिक का नाम अनिवार्य: यदि आप किसी हॉस्टल या पीजी में रहते हैं, तो उस भवन का इंद्राज (Entry) मकान मालिक या मैनेजर के नाम से होगा।
  • केवल संख्या की जानकारी: प्रगणक (Enumerators) किरायेदारों की व्यक्तिगत जानकारी या नाम मांगने के बजाय केवल उस भवन में रहने वाले कुल सदस्यों या किरायेदारों की संख्या दर्ज करेंगे। इससे डेटा संकलन में पारदर्शिता और सरलता बनी रहेगी।

बंद भवनों के लिए पड़ोसियों से ली जाएगी मदद

भवन गणना के दौरान यदि कोई मकान या बिल्डिंग बंद पाई जाती है, तो उसके लिए भी विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है।

  • पड़ोसियों से पूछताछ: यदि प्रगणक के आने के समय मकान का मालिक या कोई सदस्य उपलब्ध नहीं होता है, तो प्रगणक उस भवन के संबंध में पड़ोसियों से जानकारी लेंगे।
  • जानकारी का मिलान: पड़ोसियों से पूछा जाएगा कि भवन कितने समय से बंद है और उसका स्वामी कौन है। इस जानकारी को अस्थाई तौर पर दर्ज किया जाएगा ताकि बाद में उसका भौतिक सत्यापन किया जा सके।

25 अप्रैल से घर-घर पहुंचेंगे प्रगणक

प्रशासन ने गणना कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए प्रगणकों की टीमें गठित कर दी हैं।

  • घर-घर दस्तक: 25 अप्रैल से ये टीमें प्रत्येक क्षेत्र के हर घर और व्यावसायिक प्रतिष्ठान पर दस्तक देंगी।
  • सहयोग की अपील: जिला प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे गणना कार्य में लगे प्रगणकों को सही जानकारी उपलब्ध कराएं ताकि सरकारी योजनाओं के नियोजन के लिए सटीक आंकड़े प्राप्त हो सकें।

Popular Articles