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डिजिटल दुनिया में अब ‘एआई’ और ‘असली’ की होगी पहचान: केंद्र सरकार ने आईटी नियमों में किया दूसरा बड़ा संशोधन; कंटेंट पर लेबल लगाना होगा अनिवार्य

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश के डिजिटल परिदृश्य को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी नियम-2021 (IT Rules-2021) में एक और महत्वपूर्ण संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार ने नए नियमों का एक संशोधित ड्राफ्ट जारी कर आम जनता से इस पर राय मांगी है। गौरतलब है कि 30 मार्च को जारी किए गए मूल ड्राफ्ट में अब 21 अप्रैल को कुछ अतिरिक्त कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते दुरुपयोग, विशेषकर डीपफेक और वॉइस क्लोनिंग के खतरों से नागरिकों को बचाना है।

एआई कंटेंट पर ‘लेबल’ लगाना अब कानूनी जरूरत

नए नियमों के लागू होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे एआई द्वारा निर्मित सामग्री की स्पष्ट पहचान करें।

  • पारदर्शिता का नियम: यदि कोई वीडियो, फोटो या ऑडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाया गया है या उसमें बदलाव किया गया है, तो उसे साफ तौर पर ‘AI जेनरेटेड’ लेबल के साथ प्रदर्शित करना होगा।
  • असली जैसा दिखने वाला भ्रम: नए प्रस्ताव के अनुसार, ऐसा हर कंटेंट जो दिखने में बिल्कुल असली जैसा प्रतीत होता है लेकिन वास्तव में एआई द्वारा तैयार किया गया है, उसे बिना लेबल के पोस्ट करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

डीपफेक और वॉइस क्लोनिंग पर कड़ा प्रहार

सरकार का यह कदम हाल के दिनों में बढ़ते डीपफेक वीडियो और नकली आवाजों के जरिए होने वाली धोखाधड़ी के मामलों को देखते हुए उठाया गया है।

  • डीपफेक वीडियो: किसी व्यक्ति के चेहरे या शरीर को एआई के जरिए किसी अन्य वीडियो में जोड़कर भ्रम फैलाने वाले वीडियो अब सख्त निगरानी में होंगे।
  • वॉइस क्लोनिंग: एआई के माध्यम से किसी की आवाज की नकल कर तैयार किए गए ऑडियो संदेशों को भी अब स्पष्ट रूप से चिन्हित करना होगा ताकि लोग ठगी या गलत सूचना का शिकार न हों।

IT रूल्स में दूसरी बार संशोधन की आवश्यकता क्यों?

तकनीक की तेज रफ्तार के साथ तालमेल बिठाने के लिए सरकार ने एक ही महीने के भीतर नियमों में दूसरी बार बदलाव किया है।

  1. सुरक्षा का दायरा: 30 मार्च के ड्राफ्ट के बाद 21 अप्रैल को किए गए अतिरिक्त संशोधनों का उद्देश्य नियमों के उन लूपहोल्स (कमियों) को बंद करना है जिनका फायदा उठाकर गलत सूचनाएं फैलाई जा रही थीं।
  2. जवाबदेही तय करना: सरकार अब सोशल मीडिया कंपनियों और बिचौलियों (Intermediaries) पर यह जिम्मेदारी डाल रही है कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद एआई कंटेंट की सत्यता की जांच करें और यूजर को सूचित करें।

जनता की राय और भविष्य की रूपरेखा

फिलहाल सरकार ने इस संशोधित ड्राफ्ट को सार्वजनिक कर दिया है और विभिन्न स्टेकहोल्डर्स व आम नागरिकों से सुझाव मांगे हैं।

  • अगला कदम: प्राप्त सुझावों की समीक्षा के बाद इन नियमों को अंतिम रूप देकर अधिसूचित (Notify) किया जाएगा।
  • सजा का प्रावधान: नियमों का पालन न करने वाले प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें भारी जुर्माना भी शामिल हो सकता है।

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