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उत्तराखंड में ‘हीटवेव’ का अलर्ट: स्कूलों के समय में बदलाव की तैयारी; शिक्षा महानिदेशक ने जारी किए ‘वाटर बेल’ और सुरक्षा के कड़े निर्देश

देहरादून: उत्तराखंड के मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में सूर्य की तपिश और लगातार बढ़ते तापमान ने चिंता बढ़ा दी है। भीषण गर्मी और ‘हीटवेव’ (लू) के बढ़ते खतरे को देखते हुए प्रदेश का विद्यालयी शिक्षा विभाग पूरी तरह सतर्क मोड पर आ गया है। छात्र-छात्राओं को चिलचिलाती धूप और लू के प्रकोप से बचाने के लिए विभाग ने सभी जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। शिक्षा महानिदेशक ने स्पष्ट किया है कि बच्चों का स्वास्थ्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और स्थिति को देखते हुए स्कूलों के संचालन समय में बड़ा बदलाव किया जा सकता है।

शिक्षा महानिदेशक के कड़े निर्देश: स्वास्थ्य सुरक्षा सर्वोपरि

विद्यालयी शिक्षा महानिदेशक दीप्ति सिंह ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई हालिया समीक्षा बैठक के आधार पर विस्तृत गाइडलाइंस जारी की हैं।

  • समय में लचीलापन: सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों (CEOs) को अधिकार दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में स्थानीय तापमान और गर्मी की तीव्रता का आकलन करें। यदि आवश्यक हो, तो स्कूलों के खुलने और बंद होने के समय में तत्काल परिवर्तन किया जाए ताकि बच्चों को दोपहर की भीषण धूप में सफर न करना पड़े।
  • अधिकारियों को जिम्मेदारी: जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को निरंतर मौसम विभाग के संपर्क में रहने और स्कूलों का औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।

स्कूलों में बजेगी ‘वाटर बेल’: डिहाइड्रेशन से बचाने की अनूठी पहल

बढ़ती गर्मी में बच्चों के शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) को रोकने के लिए विभाग ने एक विशेष व्यवस्था लागू करने को कहा है।

  • अनिवार्य वाटर बेल: अब प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में नियमित अंतराल पर ‘वाटर बेल’ बजाई जाएगी। इस बेल का मुख्य उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई के बीच ब्रेक देकर पानी पीने के लिए प्रेरित करना है।
  • नियमित हाइड्रेशन: अक्सर बच्चे खेल या पढ़ाई में व्यस्त होकर पानी पीना भूल जाते हैं, ऐसे में यह ‘वाटर बेल’ सुनिश्चित करेगी कि हर छात्र समय-समय पर पानी पिए और स्वस्थ रहे।

छात्रों की सुरक्षा के लिए अन्य महत्वपूर्ण उपाय

जारी निर्देशों में केवल समय और पानी ही नहीं, बल्कि स्कूलों के भीतर की व्यवस्थाओं पर भी जोर दिया गया है:

  1. प्राथमिक चिकित्सा: प्रत्येक स्कूल में ओआरएस (ORS) के घोल और प्राथमिक चिकित्सा किट की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।
  2. धूप से बचाव: प्रार्थना सभा (मॉर्निंग असेंबली) और खेलकूद की गतिविधियों को खुले मैदान के बजाय छायादार स्थानों पर करने या उनके समय में कटौती करने की सलाह दी गई है।
  3. पेयजल की उपलब्धता: स्कूल परिसरों में स्वच्छ और शीतल पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करना अनिवार्य कर दिया गया है।

अभिभावकों और शिक्षकों से अपील

शिक्षा विभाग ने शिक्षकों और अभिभावकों से भी अपील की है कि वे बच्चों को धूप में निकलते समय सिर ढकने और सूती कपड़े पहनने के लिए प्रेरित करें। साथ ही, बच्चों के खान-पान पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है।

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