तेहरान/वाशिंगटन: ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी खींचतान एक बार फिर चरम पर पहुँच गई है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने परमाणु संवर्धन (Nuclear Enrichment) के अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा और किसी भी बाहरी दबाव में अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि परमाणु ऊर्जा का अधिकार अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत सुरक्षित है और इसे किसी ‘रियायत’ के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
संवर्धन की अवधि पर फंसा पेंच
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों के बीच प्रस्तावित शांति समझौते को लेकर समय सीमा पर बड़ा मतभेद उभर कर सामने आया है:
- अमेरिका की मांग: वाशिंगटन चाहता है कि ईरान कम से कम 20 वर्षों के लिए अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह स्थगित कर दे।
- ईरान का रुख: तेहरान केवल 5 वर्षों के लिए कार्यक्रम रोकने पर अड़ा है।
- यूरेनियम का मुद्दा: अमेरिका का दबाव है कि ईरान अपने पास मौजूद उच्च-स्तरीय संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर भेजे, लेकिन ईरान ने साफ कर दिया है कि वह ऐसा तभी करेगा जब उसके ऊपर लगे सभी कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाया जाएगा।
“रियायत नहीं, हमारा वैध अधिकार”: इस्माइल बगाई
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने गुरुवार को आधिकारिक बयान जारी करते हुए पश्चिमी मीडिया की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा:
- कानूनी अधिकार: परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग और संवर्धन ‘परमाणु अप्रसार संधि’ (NPT) के तहत ईरान का वैध अधिकार है।
- कोई रियायत नहीं: बगाई ने जोर देकर कहा कि ईरान अपने संप्रभु अधिकारों को किसी सौदेबाजी या रियायत के रूप में नहीं देखता।
- होर्मुज पर अडिग: ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) क्षेत्र से भी अपने सैन्य या कूटनीतिक कदम पीछे खींचने से इनकार कर दिया है।
वार्ता के लिए पूर्व शर्तें
हाल ही में पाकिस्तान में हुई ईरान-अमेरिका वार्ता के संदर्भ में बगाई ने स्पष्ट किया कि किसी भी ठोस मुद्दे पर चर्चा तभी आगे बढ़ सकती है, जब समझौते का एक व्यापक और न्यायसंगत ढांचा तय हो जाए। उन्होंने दोहराया कि जब तक अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय प्रतिबंधों को हटाने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाते, तब तक तेहरान की ओर से किसी बड़ी पहल की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए।




