देहरादून (20 मार्च, 2026): देश के चार महत्वपूर्ण राज्यों—पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम और केरल—में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के लिए निर्वाचन आयोग ने उत्तराखंड के वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उत्तराखंड शासन से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश के कुल 14 अधिकारियों की ड्यूटी इन राज्यों में बतौर चुनाव पर्यवेक्षक (Observer) लगाई गई है। इनमें 11 आईएएस (IAS) और 3 आईपीएस (IPS) अधिकारी शामिल हैं, जो चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे।
केरल और तमिलनाडु में IAS अफसरों की तैनाती: रंजीत सिन्हा और राजेंद्र कुमार को कमान
निर्वाचन आयोग ने उत्तराखंड के अनुभवी प्रशासनिक अधिकारियों को दक्षिण भारतीय राज्यों में तैनात किया है:
- केरल विधानसभा चुनाव: वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजेंद्र कुमार, श्रीधर बाबू अद्दांकी और रंजीत सिन्हा को केरल में चुनाव पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। ये अधिकारी वहां मतदान केंद्रों की व्यवस्था और आदर्श आचार संहिता के पालन की निगरानी करेंगे।
- तमिलनाडु और असम: अन्य आईएएस अधिकारियों को पश्चिम बंगाल और असम जैसे संवेदनशील राज्यों में चुनावी खर्च और सामान्य व्यवस्था देखने की जिम्मेदारी दी गई है।
3 IPS अधिकारी संभालेंगे सुरक्षा का मोर्चा
चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए उत्तराखंड कैडर के तीन तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारियों को भी फील्ड में उतारा गया है:
- पुलिस पर्यवेक्षक की भूमिका: ये अधिकारी चुनाव वाले राज्यों में अर्धसैनिक बलों की तैनाती, संवेदनशील बूथों की सुरक्षा और स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय का कार्य करेंगे।
- निष्पक्ष चुनाव का संकल्प: इनका मुख्य कार्य यह सुनिश्चित करना होगा कि मतदाता बिना किसी डर या दबाव के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।
2 IAS अफसर ‘रिजर्व’ में: आपात स्थिति के लिए तैयार
चुनाव आयोग ने सावधानी बरतते हुए उत्तराखंड के दो अन्य आईएएस अधिकारियों को फिलहाल ‘आरक्षित वर्ग’ (Reserve List) में रखा है। यदि चुनाव के दौरान किसी अधिकारी का स्वास्थ्य खराब होता है या किसी अतिरिक्त पर्यवेक्षक की आवश्यकता पड़ती है, तो इन रिजर्व अधिकारियों को तत्काल संबंधित राज्य में भेजा जाएगा।
उत्तराखंड शासन में कामकाज पर असर?
इतनी बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिकारियों के चुनाव ड्यूटी पर जाने से उत्तराखंड के विभिन्न विभागों के कामकाज पर भी असर पड़ सकता है:
- अतिरिक्त प्रभार: इन अधिकारियों की अनुपस्थिति के दौरान इनके विभागों का कार्यभार शासन के अन्य सचिवों और अधिकारियों को सौंपा जाएगा।
- विभागीय समीक्षा: मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि जनहित के कार्य प्रभावित न हों और फाइलों का निपटारा समय पर किया जाए।





