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पश्चिम एशिया संकट: एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री के बीच चौथी बार हुई अहम वार्ता; होर्मुज जलडमरूमध्य से सकारात्मक संकेत

नई दिल्ली/तेहरान (13 मार्च, 2026): पश्चिम एशिया (Mid-East) में गहराते तनाव और युद्ध की आशंकाओं के बीच भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच एक बार फिर उच्च स्तरीय टेलीफोनिक वार्ता हुई। संकट की शुरुआत के बाद से दोनों नेताओं के बीच यह चौथी औपचारिक बातचीत है। इस संवाद का मुख्य केंद्र क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों की सुरक्षा सुनिश्चित करना रहा। इस वार्ता के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में फंसे भारतीय हितों और व्यापारिक जहाजों को लेकर राहत भरी खबरें सामने आ रही हैं।

राजनयिक चर्चा के मुख्य बिंदु: शांति और स्थिरता पर जोर

विदेश मंत्री जयशंकर ने इस बातचीत के जरिए भारत की चिंताओं और क्षेत्रीय शांति के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया:

  • तनाव कम करने की अपील: भारत ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य विस्तार वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए घातक होगा।
  • रणनीतिक संवाद की निरंतरता: दोनों देशों के बीच कम समय में हुई चार दौर की बातचीत यह दर्शाती है कि भारत और ईरान पश्चिम एशिया के संकट में एक-दूसरे को महत्वपूर्ण साझेदार मानते हैं।
  • भारतीयों की सुरक्षा: जयशंकर ने ईरान में रह रहे और वहां से गुजरने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया।

होर्मुज जलडमरूमध्य से ‘अच्छी खबर’

वैश्विक व्यापार के लिए लाइफलाइन माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य से भारत के लिए सकारात्मक संकेत मिले हैं:

  1. व्यापारिक मार्ग की सुरक्षा: ईरानी विदेश मंत्री ने आश्वासन दिया है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के तहत व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को बाधित नहीं किया जाएगा।
  2. भारतीय चालक दल को राहत: पूर्व में पकड़े गए या क्षेत्र में रुके हुए व्यापारिक जहाजों पर तैनात भारतीय नाविकों की रिहाई और उनकी सुगम वापसी को लेकर ईरान ने सहयोग का वादा किया है।
  3. ऊर्जा आपूर्ति का संकट टला: तेल की आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण इस रास्ते के खुले रहने की पुष्टि से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में संभावित उछाल पर लगाम लगने की उम्मीद है।

चाबहार पोर्ट और द्विपक्षीय संबंध

बातचीत के दौरान न केवल वर्तमान संकट, बल्कि दीर्घकालिक परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई:

  • चाबहार का महत्व: संकट के बावजूद दोनों नेताओं ने चाबहार बंदरगाह परियोजना की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। भारत के लिए यह बंदरगाह मध्य एशिया तक पहुंचने का प्रमुख द्वार है।
  • आतंकवाद पर कड़ा रुख: जयशंकर ने क्षेत्र में सक्रिय चरमपंथी समूहों के नियंत्रण और समुद्री डकैती जैसी समस्याओं पर साझा सहयोग की आवश्यकता जताई।

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