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तेल संकट पर घमासान; राहुल गांधी की चेतावनी- ‘युद्ध के नतीजे होंगे दूरगामी’, हरदीप पुरी ने आंकड़ों से दिया जवाब

नई दिल्ली (12 मार्च, 2026): संसद के बजट सत्र में आज पश्चिम एशिया के युद्ध और उसके कारण उपजे वैश्विक तेल संकट पर जोरदार बहस हुई। लोकसभा में ‘काम रोको प्रस्ताव’ के तहत हुई इस चर्चा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार को आगाह करते हुए कहा कि इस युद्ध के आर्थिक प्रभाव देश के लिए बेहद गंभीर होंगे। वहीं, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सरकार का पक्ष रखते हुए देश को भरोसा दिलाया कि भारत के पास पर्याप्त रणनीतिक भंडार मौजूद है और घबराने की आवश्यकता नहीं है।

राहुल गांधी की चेतावनी: “यह केवल तेल की बात नहीं, भविष्य का संकट है”

चर्चा की शुरुआत करते हुए राहुल गांधी ने सरकार की विदेश और आर्थिक नीति पर सवाल उठाए। उनके भाषण के मुख्य अंश निम्नलिखित रहे:

  • दूरगामी परिणाम: राहुल गांधी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष केवल कुछ हफ्तों की बात नहीं है; इसके नतीजे भारत की अर्थव्यवस्था और मध्यम वर्ग पर लंबे समय तक दिखाई देंगे।
  • महंगाई का चक्र: उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार तेल की कीमतों को नियंत्रित करने में विफल रही है, जिसका सीधा असर परिवहन और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर पड़ रहा है।
  • रणनीतिक चूक: राहुल ने सवाल किया कि जब युद्ध के बादल मंडरा रहे थे, तब सरकार ने वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों और ऊर्जा सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए?

हरदीप पुरी का पलटवार: “हमारे पास 90 दिनों का बैकअप तैयार”

राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आक्रामक रुख अपनाया और सरकार की तैयारियों का ब्योरा पेश किया:

  1. आपूर्ति में विविधता: पुरी ने कहा कि भारत अब केवल एक क्षेत्र पर निर्भर नहीं है। हमने रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देशों से तेल आयात बढ़ाकर अपनी ऊर्जा टोकरी (Energy Basket) में विविधता ला दी है।
  2. रणनीतिक भंडार (Strategic Reserves): उन्होंने सदन को सूचित किया कि भारत के पास भूमिगत गुफाओं में पर्याप्त मात्रा में कच्चा तेल सुरक्षित है, जो किसी भी आपात स्थिति में देश की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है।
  3. कीमतों पर नियंत्रण: मंत्री ने दावा किया कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें $100 के पार होने के बावजूद, सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए ‘एक्साइज ड्यूटी’ में कटौती जैसे कदम उठाए हैं।

सदन में भारी हंगामा और नोकझोंक

चर्चा के दौरान जब हरदीप पुरी ने यूपीए शासनकाल के दौरान तेल बॉन्ड्स का जिक्र किया, तो विपक्षी सदस्यों ने भारी हंगामा शुरू कर दिया।

  • विपक्ष का वॉकआउट: राहुल गांधी के भाषण के बाद जब सरकार की ओर से जवाब दिया जा रहा था, तब कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने ‘असंतोषजनक जवाब’ का हवाला देते हुए सदन से वॉकआउट किया।

सरकार का स्टैंड: संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि विपक्ष केवल डर का माहौल बनाना चाहता है, जबकि देश आर्थिक रूप से पूरी तरह सुरक्षित है।

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