मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध अब 13वें दिन में प्रवेश कर गया है। क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और दोनों पक्षों की ओर से मिसाइलों और ड्रोन हमलों का सिलसिला जारी है। हालात ऐसे हैं कि पूरा मिडिल ईस्ट हिंसा और सैन्य टकराव की आग में झुलसता दिखाई दे रहा है।
गुरुवार, 12 मार्च को भी इजरायल से लेकर सऊदी अरब तक कई इलाकों में हवाई हमलों और सैन्य गतिविधियों की खबरें सामने आईं। ईरान ने इजरायल की ओर मिसाइलें दागीं, जबकि सऊदी अरब ने अपने तेल क्षेत्रों को निशाना बनाकर किए गए ड्रोन हमले को सफलतापूर्वक रोक दिया। इन घटनाओं ने खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि ईरान इस युद्ध में हार की कगार पर है और अमेरिकी सेना अपने हमलों को और तेज कर सकती है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका के पास ऐसे विकल्प मौजूद हैं जिनसे ईरान के सैन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया जा सकता है, जिससे उसका पुनर्निर्माण “लगभग असंभव” हो जाएगा।
हालांकि जमीनी हालात कुछ और ही संकेत दे रहे हैं। ईरान युद्ध को लंबा खींचने से पीछे हटता नहीं दिख रहा है और उसके सहयोगी संगठन भी सक्रिय हो गए हैं। ईरान समर्थित संगठन Hezbollah ने इजरायल के शहर Tel Aviv में स्थित इजरायली सैन्य खुफिया ठिकाने को निशाना बनाकर मिसाइलें दागी हैं।
लगातार हो रहे इन हमलों से पूरे मिडिल ईस्ट में अस्थिरता बढ़ती जा रही है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी गहराती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष इसी तरह जारी रहा, तो इसका असर वैश्विक राजनीति, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर और गहरा हो सकता है।




