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कालाबाजारी की भेंट चढ़ी रसोई गैस: यूरिया उत्पादन ठप होने से खेती पर संकट; देशभर के हजारों होटलों में लटका ताला

नई दिल्ली/देहरादून (12 मार्च, 2026): वैश्विक ऊर्जा संकट और आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के बीच भारत में एलपीजी (LPG) और प्राकृतिक गैस की किल्लत ने भयावह रूप ले लिया है। एक ओर जहाँ घरेलू गैस सिलेंडरों की किल्लत के पीछे बड़े पैमाने पर हो रही ‘कालाबाजारी’ को जिम्मेदार माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर गैस की कमी ने देश के औद्योगिक और सेवा क्षेत्र की कमर तोड़ दी है। इस संकट के कारण देश के कई प्रमुख यूरिया संयंत्रों (Fertilizer Plants) में उत्पादन पूरी तरह बंद हो गया है, जबकि गैस न मिलने से हजारों होटलों और रेस्टोरेंट्स पर ताले लग गए हैं।

कालाबाजारी का जाल: घर की रसोई से गायब हुआ सिलेंडर

आपूर्ति में आई मामूली गिरावट का फायदा उठाकर बिचौलियों और कालाबाजारी करने वालों ने बाजार पर कब्जा कर लिया है:

  • अवैध भंडारण: खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, कई जिलों में गैस वितरकों और बिचौलियों ने सिलेंडरों का अवैध स्टॉक कर लिया है, जिसे ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है।
  • दोगुने दाम: ₹1100-1200 में मिलने वाला घरेलू सिलेंडर अब काले बाजार में ₹2500 से ₹3000 तक में बिक रहा है।
  • उपभोक्ता बेहाल: आम आदमी की बुकिंग हफ्तों से पेंडिंग है, जबकि रसूखदारों और व्यावसायिक इकाइयों को ऊंचे दामों पर आसानी से सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

खेती पर संकट: यूरिया उत्पादन बंद

प्राकृतिक गैस की कमी का सबसे घातक असर देश के कृषि क्षेत्र पर पड़ा है। कच्चे माल के रूप में गैस न मिलने के कारण कई खाद कारखाने बंद हो गए हैं:

  1. उत्पादन ठप: यूपी, गुजरात और ओडिशा स्थित प्रमुख यूरिया संयंत्रों ने परिचालन रोक दिया है, जिससे खाद का बफर स्टॉक खत्म होने की कगार पर है।
  2. किसानों की चिंता: रबी की फसल की कटाई और आगामी खरीफ सीजन की तैयारी के बीच यूरिया की किल्लत किसानों के लिए नई मुसीबत बन गई है।
  3. आयात पर निर्भरता: घरेलू उत्पादन गिरने से भारत को अब महंगे दामों पर खाद आयात करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

पर्यटन और खान-पान उद्योग को झटका: हजारों होटलों पर ताले

कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कीमतों में भारी उछाल और उनकी अनुपलब्धता ने छोटे और मध्यम स्तर के ढाबों और होटलों को कारोबार बंद करने पर मजबूर कर दिया है:

  • लागत में वृद्धि: होटल मालिकों का कहना है कि गैस की कमी के कारण भोजन पकाने की लागत 40% तक बढ़ गई है, जिससे ग्राहकों को सेवा देना घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
  • रोजगार का संकट: अकेले उत्तर भारत में पिछले तीन दिनों में 5000 से अधिक छोटे होटलों और भोजनालयों में कामकाज ठप होने की खबर है, जिससे हजारों कामगारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
  • पर्यटन पर असर: मसूरी, नैनीताल और शिमला जैसे पर्यटन केंद्रों पर भी गैस संकट के चलते कैफे और रेस्टोरेंट्स बंद हो रहे हैं।

प्रशासन की कार्रवाई: छापेमारी के निर्देश

बढ़ते जन आक्रोश को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों ने सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं:

  • छापेमारी अभियान: जिला पूर्ति अधिकारियों (DSO) को गैस एजेंसियों के गोदामों की जांच करने और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ ‘गैंगस्टर एक्ट’ के तहत कार्रवाई करने को कहा गया है।
  • राशनिंग व्यवस्था: प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि गैस की पहली प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ताओं और कृषि आधारित उद्योगों को दी जाए।

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