देहरादून: उत्तराखंड के वार्षिक बजट 2026 के केंद्र में ग्रामीण विकास और पर्वतीय क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे को रखा गया है। इस संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने राज्य सरकार को 750 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने की स्वीकृति प्रदान की है। इस भारी निवेश का मुख्य उद्देश्य राज्य के दूरदराज के गांवों में सड़क संपर्क, पेयजल योजनाओं और कृषि आधारित बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस सहयोग का स्वागत करते हुए संबंधित विभागों को कार्ययोजना तैयार कर ‘मिशन मोड’ में काम शुरू करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
कहाँ खर्च होंगे 750 करोड़? इन क्षेत्रों पर रहेगा फोकस
नाबार्ड द्वारा स्वीकृत इस फंड का उपयोग ग्रामीण बुनियादी ढांचे (RIDF) के तहत विभिन्न परियोजनाओं में किया जाएगा:
- ग्रामीण सड़कें और पुल: प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में कनेक्टिविटी सुधारने के लिए नई सड़कों के निर्माण और पुराने पुलों के पुनर्निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी।
- पेयजल योजनाएं: ‘हर घर नल से जल’ अभियान को गति देते हुए उन गांवों में पाइपलाइन बिछाई जाएगी जहाँ भौगोलिक परिस्थितियों के कारण पानी पहुँचाना चुनौतीपूर्ण है।
- सिंचाई और कृषि: छोटे किसानों के लिए नहरों की मरम्मत, चेक डैम का निर्माण और कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा ताकि स्थानीय उत्पादों को बाजार मिल सके।
विभागीय सुस्ती पर सख्त सरकार: “समय पर पूरा हो काम”
बजट प्रावधानों और नाबार्ड की सहायता के बाद शासन ने नौकरशाही की जवाबदेही तय कर दी है:
- डेडलाइन का पालन: मुख्य सचिव ने लोक निर्माण विभाग (PWD), सिंचाई और पेयजल निगम को निर्देश दिए हैं कि सभी टेंडर प्रक्रियाएं पारदर्शी तरीके से और तय समय सीमा के भीतर पूरी की जाएं।
- गुणवत्ता की निगरानी: परियोजनाओं में घटिया सामग्री के इस्तेमाल को रोकने के लिए ‘थर्ड पार्टी ऑडिट’ की व्यवस्था की गई है।
- धन का सदुपयोग: विभागों को चेतावनी दी गई है कि स्वीकृत बजट का उपयोग वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले अनिवार्य रूप से किया जाए ताकि फंड ‘लैप्स’ न हो।
पलायन पर लगेगी लगाम: ग्रामीण आर्थिकी को मिलेगा संबल
विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026 में नाबार्ड की यह मदद उत्तराखंड के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकती है:
- स्थानीय रोजगार: गांवों में निर्माण कार्य शुरू होने से स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
- कृषि पर्यटन: बुनियादी ढांचा सुधरने से होमस्टे और कृषि पर्यटन (Agri-Tourism) को बढ़ावा मिलेगा, जिससे गांवों से होने वाले पलायन में कमी आने की उम्मीद है।





