नई टिहरी: जनमानस की समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए उत्तराखंड सरकार के ‘सरलीकरण और समाधान’ के मंत्र को आगे बढ़ाते हुए जिलाधिकारी (DM) नितिका खंडेलवाल ने कलेक्ट्रेट परिसर में जिला स्तरीय ‘जनता दरबार’ का आयोजन किया। इस दौरान जिले के दूर-दराज के क्षेत्रों से आए ग्रामीणों ने अपनी व्यथा सुनाई। जनता दरबार में कुल 29 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से अधिकांश का निस्तारण डीएम ने मौके पर ही संबंधित विभागों के माध्यम से कर दिया। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जन समस्याओं की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और शिकायतों के निस्तारण में देरी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
समस्याओं का स्वरूप: सड़क, पानी और शिक्षा पर रहा जोर
जनता दरबार में पहुँचे फरियादियों ने बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी कई महत्वपूर्ण मांगें और शिकायतें रखीं:
- सड़क और यातायात: विभिन्न गांवों के ग्रामीणों ने टूटी सड़कों की मरम्मत और कुछ क्षेत्रों में नई सड़क कटिंग के दौरान हुए नुकसान के मुआवजे की मांग की।
- पेयजल संकट: ग्रामीण इलाकों में पेयजल लाइनों के क्षतिग्रस्त होने और गर्मियों से पहले पानी की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जल संस्थान को निर्देश दिए गए।
- शिक्षा और स्वास्थ्य: कुछ विद्यालयों में शिक्षकों की कमी और स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों की उपलब्धता को लेकर भी शिकायतें दर्ज की गईं।
डीएम के कड़े निर्देश: “कार्यालयों के चक्कर न काटनी पड़े जनता”
शिकायतों को सुनने के बाद जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल ने उपस्थित अधिकारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए:
- समय सीमा का निर्धारण: जो शिकायतें मौके पर हल नहीं हो सकीं, उनके लिए डीएम ने संबंधित विभागों को एक सप्ताह का समय दिया है।
- सत्यापन (Verification): डीएम ने कहा कि केवल कागजों पर शिकायत निस्तारण नहीं माना जाएगा; वे स्वयं रैंडम आधार पर शिकायतकर्ताओं को फोन कर फीडबैक लेंगी।
- संवेदनशीलता: अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि बुजुर्गों और दिव्यांगों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाए ताकि उन्हें बार-बार जिला मुख्यालय न आना पड़े।
जनता की प्रतिक्रिया: पारदर्शी प्रशासन की उम्मीद
जनता दरबार में पहुँचे ग्रामीणों ने जिलाधिकारी की इस पहल की सराहना की। प्रताप नगर और जौनपुर क्षेत्र से आए ग्रामीणों का कहना था कि इस तरह के आयोजनों से प्रशासन और जनता के बीच की दूरी कम होती है और दफ्तरों की लालफीताशाही से राहत मिलती है।





