Monday, March 2, 2026

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होर्मुज स्ट्रेट पर संकट से वैश्विक अर्थव्यवस्था में भूचाल: कच्चा तेल 10% महंगा; भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई बढ़ने का बढ़ा खतरा

नई दिल्ली/दुबई: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण Strait of Hormuz के बंद होने की खबरों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है। इस महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग के बाधित होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में 10 प्रतिशत का भारी उछाल दर्ज किया गया है। चूंकि दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए इसके बंद होने का सीधा और सबसे गहरा असर भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने की आशंका है। भारत अपनी तेल जरूरतों का 80 प्रतिशत से अधिक आयात करता है, जिससे घरेलू स्तर पर महंगाई का नया दौर शुरू हो सकता है।

क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज स्ट्रेट? तेल आपूर्ति की लाइफलाइन

Strait of Hormuz ओमान और ईरान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री रास्ता है जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है:

  • वैश्विक आपूर्ति: दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और भारी मात्रा में एलएनजी (LNG) इसी मार्ग से होकर गुजरती है।
  • प्रमुख निर्यातक: सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और इराक जैसे बड़े तेल उत्पादक देश इसी रास्ते का उपयोग करते हैं।
  • विकल्प का अभाव: इस मार्ग के बंद होने का मतलब है कि टैंकरों को हजारों मील का अतिरिक्त चक्कर काटना होगा, जिससे मालभाड़ा (Freight) और बीमा लागत कई गुना बढ़ जाएगी।

भारत पर असर: अर्थव्यवस्था के लिए ‘दोहरी मार’

भारत के लिए तेल की कीमतों में 10% की यह वृद्धि कई मोर्चों पर संकट पैदा कर सकती है:

  1. पेट्रोल-डीजल की कीमतें: यदि कच्चे तेल के दाम इसी स्तर पर बने रहते हैं, तो तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतें बढ़ाने का भारी दबाव होगा।
  2. महंगाई (Inflation): डीजल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर फल, सब्जी और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा।
  3. राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit): महंगा तेल खरीदने के लिए भारत को अधिक डॉलर खर्च करने होंगे, जिससे व्यापार घाटा बढ़ेगा और भारतीय रुपया कमजोर हो सकता है।
  4. शेयर बाजार में गिरावट: अनिश्चितता के चलते विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से पैसा निकाल सकते हैं, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान की आशंका है।

सरकार की रणनीति: आपातकालीन भंडार पर नजर

भारत सरकार स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है और संकट से निपटने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रही है:

  • रणनीतिक तेल भंडार (SPR): भारत के पास विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में भूमिगत तेल भंडार हैं, जो आपात स्थिति में लगभग 9-10 दिनों की जरूरत पूरी कर सकते हैं।
  • आपूर्ति का विविधीकरण: सरकार रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देशों से तेल आयात बढ़ाने की कोशिश कर रही है ताकि खाड़ी देशों पर निर्भरता कम की जा सके।
  • डिप्लोमैटिक चैनल: भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आपूर्ति शृंखला को खुला रखने के लिए कूटनीतिक दबाव बना रहा है।

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