नई दिल्ली: भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से जारी कूटनीतिक तनाव के बाद आज का दिन दोनों देशों के रिश्तों के लिए एक नया ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित होने जा रहा है। कनाडा के नवनियुक्त प्रधानमंत्री मार्क कार्नी अपनी आधिकारिक भारत यात्रा के दौरान आज राजधानी दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय शिखर वार्ता करेंगे। पिछले कुछ वर्षों में उपजे गंभीर कूटनीतिक गतिरोध के बाद यह किसी कनाडाई प्रधानमंत्री की पहली बड़ी भारत यात्रा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक विशेषज्ञता रखने वाले मार्क कार्नी का यह दौरा दोनों देशों के बीच जमी ‘बर्फ को पिघलाने’ (Diplomatic Thaw) और रणनीतिक साझेदारी को फिर से जीवित करने का एक बड़ा प्रयास है।
वार्ता का मुख्य एजेंडा: व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा
आज होने वाली प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा और समझौतों की संभावना है:
- आर्थिक साझेदारी: पिछले कुछ समय से ठंडे बस्ते में पड़े ‘व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते’ (CEPA) को लेकर फिर से बातचीत शुरू हो सकती है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाएं कम होंगी।
- ऊर्जा और यूरेनियम: भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए कनाडा से यूरेनियम की स्थिर आपूर्ति को लेकर एक दीर्घकालिक समझौते पर मुहर लग सकती है।
- सुरक्षा और आतंकवाद: दोनों देश आतंकवाद, कट्टरपंथ और संगठित अपराध के खिलाफ साझा तंत्र विकसित करने पर विचार करेंगे। भारत की ओर से अलगाववादी तत्वों पर लगाम लगाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जा सकता है।
- छात्र और आव्रजन (Immigration): कनाडा में रह रहे लाखों भारतीय छात्रों और प्रवासियों के हितों की रक्षा और वीजा प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर भी सार्थक चर्चा होने की उम्मीद है।
तनाव के बाद सुधार की पहल: ‘कार्नी फैक्टर’ का महत्व
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के कार्यकाल में भारत-कनाडा संबंधों में यह बदलाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है:
- कूटनीतिक पुनर्गठन: भारत और कनाडा के बीच पिछले साल पैदा हुई कड़वाहट के बाद, मार्क कार्नी ने कमान संभालते ही भारत के साथ संबंधों को प्राथमिकता देने का संकेत दिया है।
- आर्थिक दृष्टिकोण: मार्क कार्नी का बैकग्राउंड अर्थशास्त्र और बैंकिंग का रहा है, इसलिए वे भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में देखते हुए व्यापारिक रिश्तों को राजनीति से अलग रखने के पक्षधर हैं।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग: दोनों नेता हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा को लेकर अपनी साझा प्राथमिकताओं पर भी बातचीत कर सकते हैं।





