कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता और आसपास के जिलों में हाल ही में महसूस किए गए भूकंप के हल्के झटकों ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। सोशल मीडिया और स्थानीय गलियारों में यह चर्चा ज़ोर पकड़ रही है कि क्या इन झटकों का संबंध बांग्लादेश द्वारा किए जा रहे किसी ‘गुप्त परमाणु परीक्षण’ (Secret Nuclear Test) से है? हालांकि, आधिकारिक तौर पर भूकंप का केंद्र और कारण प्राकृतिक बताए गए हैं, लेकिन बांग्लादेश के निर्माणाधीन ‘रुपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र’ (Rooppur Nuclear Power Plant) और वहां चल रही गतिविधियों ने इन कयासों को हवा दी है।
चर्चा क्यों शुरू हुई? भूकंप और परमाणु संयंत्र का संयोग
कोलकाता में आए झटकों के बाद इन दावों के पीछे मुख्य रूप से तीन तर्क दिए जा रहे हैं:
- भूकंप का असामान्य समय: चर्चा करने वालों का दावा है कि भूकंप के झटके ऐसे समय महसूस किए गए जब क्षेत्र में कोई सक्रिय टेक्टोनिक हलचल की पूर्व चेतावनी नहीं थी।
- रुपपुर प्रोजेक्ट की गति: बांग्लादेश में रूस की मदद से बन रहे रुपपुर परमाणु संयंत्र का काम अंतिम चरण में है। हाल ही में वहां यूरेनियम की खेप पहुँचने और टेस्टिंग की खबरों को कुछ लोगों ने ‘हथियार परीक्षण’ या ‘अंडरग्राउंड ब्लास्ट’ समझ लिया।
- सीमा से नजदीकी: रुपपुर संयंत्र पश्चिम बंगाल की सीमा से बहुत अधिक दूर नहीं है, जिससे किसी भी बड़ी गतिविधि का असर सीमा पार महसूस होना संभव माना जाता है।
वैज्ञानिक और आधिकारिक पक्ष: क्या कहते हैं आंकड़े?
रक्षा विशेषज्ञों और भूगर्भ वैज्ञानिकों ने इन दावों को पूरी तरह से निराधार और काल्पनिक करार दिया है:
- प्राकृतिक भूकंप: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और सिस्मोलॉजी केंद्रों के अनुसार, कोलकाता में महसूस किए गए झटके टेक्टोनिक प्लेटों की सामान्य हलचल का परिणाम थे, जिसका केंद्र हिमालयी क्षेत्र या बंगाल की खाड़ी में स्थित था।
- ऊर्जा संयंत्र बनाम हथियार: बांग्लादेश का ‘रुपपुर’ प्रोजेक्ट पूरी तरह से नागरिक परमाणु ऊर्जा (Civilian Nuclear Energy) के लिए है। यह अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की सख्त निगरानी में है। बिजली बनाने के लिए होने वाले टेस्ट और परमाणु बम परीक्षण में जमीन-आसमान का अंतर होता है।
- सिस्मिक सिग्नेचर: विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कोई परमाणु परीक्षण (चाहे वह गुप्त ही क्यों न हो) किया जाता है, तो सिस्मोग्राफ पर उसका ‘सिग्नेचर’ (ग्राफ) प्राकृतिक भूकंप से बिल्कुल अलग होता है। अभी तक ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है।
विशेषज्ञों की राय: अफवाहों से बचने की सलाह
सामरिक मामलों के जानकारों का मानना है कि बांग्लादेश जैसे देश के लिए, जो रूस और भारत जैसे देशों के तकनीकी सहयोग पर निर्भर है, अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ जाकर गुप्त परीक्षण करना लगभग असंभव है।
- IAEA की निगरानी: बांग्लादेश परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का हस्ताक्षरकर्ता है। वहां के संयंत्र में लगे सेंसर और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षक हर छोटी गतिविधि पर नज़र रखते हैं।
- भ्रामक सूचनाएं: सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अक्सर प्राकृतिक आपदाओं के समय इस तरह की ‘कॉन्स्पिरेंसी थ्योरी’ (साजिश की कहानियां) पड़ोसी देशों के बीच अविश्वास पैदा करने के लिए फैलाई जाती हैं।





